Professional Tax: भारत के कई राज्यों में प्रोफेशनल टैक्स लगता है। प्रोफेशन, व्यापार और नौकरी से इनकम कमाने वाले लोगों पर यह टैक्स लगता है।
Professional Tax: भारत में लोगों को कई तरह के टैक्स देने होते हैं। इनमें डायरेक्ट टैक्स और इनडायरेक्ट टैक्स दोनों शामिल हैं। इनडायरेक्ट टैक्स में GST और VAT जैसे टैक्स आते हैं, जबकि डायरेक्ट टैक्स में इनकम टैक्स जैसे कर शामिल होते हैं। प्रोफेशनल टैक्स भी डायरेक्ट टैक्स में ही आता है। प्रोफेशनल टैक्स राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाता है।
हालांकि, इनकम टैक्स जितनी चर्चा प्रोफेशनल टैक्स की नहीं होती, लेकिन जिन राज्यों में यह लागू है, वहां काम करने वाले लोगों के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है। इसके बारे में अवेयर रहकर आप अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग बेहतर तरीके से कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि यह क्या है और किन्हें देना होता है।
प्रोफेशनल टैक्स एक प्रकार का डायरेक्ट टैक्स है, जिसे राज्य सरकारें उन व्यक्तियों या संस्थाओं पर लगाती हैं जो किसी पेशे, व्यापार या नौकरी से आय कमाते हैं। यह टैक्स इनकम के आधार पर लगाया जाता है। नौकरीपेशा लोगों के लिए यह टैक्स उनके नियोक्ता (Employer) द्वारा सैलरी से काटकर राज्य सरकार को जमा किया जाता है। जबकि स्वरोजगार (Self-employed) करने वाले लोगों को यह टैक्स स्वयं राज्य सरकार को जमा करना होता है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 276 के अनुसार, प्रोफेशनल टैक्स की अधिकतम सीमा 2,500 रुपये सालाना है। इसके अलावा, आयकर अधिनियम 1961 के तहत प्रोफेशनल टैक्स को टैक्सेबल इनकम से घटाया जा सकता है, जिससे आपकी कुल टैक्स देनदारी कम हो सकती है। यह एक राज्य स्तरीय टैक्स है, इसलिए इसकी दर और नियम अलग-अलग राज्यों में अलग हो सकते हैं। साथ ही, यह टैक्स सभी राज्यों में लागू नहीं है।
इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रोफेशनल टैक्स लगता है:
इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रोफेशनल टैक्स लागू नहीं है:
जिन राज्यों में प्रोफेशनल टैक्स लागू है, वहां निम्न लोगों को यह टैक्स देना होता है:
सरकारी और निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को प्रोफेशनल टैक्स देना होता है। कर्मचारियों के लिए यह टैक्स उनके नियोक्ता द्वारा सैलरी से काटकर राज्य सरकार को जमा किया जाता है।
डॉक्टर, वकील, आर्किटेक्ट, चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंसल्टेंट जैसे प्रोफेशनल लोगों को यह टैक्स देना होता है।
कई राज्यों में बिजनेस करने वाले और स्वयं रोजगार करने वाले लोगों को भी यह टैक्स देना होता है। हालांकि, एक निश्चित आय सीमा से कम कमाने वाले लोगों को प्रोफेशनल टैक्स से छूट मिलती है। यह सीमा राज्य के अनुसार अलग-अलग होती है।
नौकरीपेशा लोगों के लिए प्रोफेशनल टैक्स CTC का हिस्सा नहीं होता है। यह आपकी सैलरी से कटने वाला एक डिडक्शन होता है। यह आपकी टेक-होम सैलरी को कम करता है। यह टैक्स हर महीने आपकी ग्रॉस सैलरी के आधार पर काटा जाता है।
हालांकि दोनों डायरेक्ट टैक्स हैं, लेकिन इन दोनों में कई अंतर हैं। इनकम टैक्स केंद्र सरकार द्वारा एक वित्त वर्ष में किसी इंडिविजुअल या संस्था की आय पर लिया जाता है। इनकम टैक्स की दर करदाता के टैक्स स्लैब पर डिपेंड करती है। टैक्स स्लैब सरकार द्वारा तय किये जाते हैं। आप जितना कमाते हैं, उतना ही टैक्स बढ़ता जाता है। यहां कोई अधिकतम सीमा नहीं है।
दूसरी तरफ प्रोफेशनल टैक्स विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा कर्मचारी, प्रोफेशनल्स और बिजनेस ऑनर्स की ग्रॉस सैलरी पर लगाया जाता है। यह प्रोफेशन और व्यापार पर आधारित होता है। प्रोफेशनल टैक्स की अधिकतम सीमा 2500 रुपये होती है।