High Protein Foods: भारत में वे प्रोटीन की कीमतों में भारी उछाल आया है। ग्लोबल सप्लाई संकट, बढ़ती मांग और शिपिंग समस्याओं की वजह से प्रोटीन पाउडर, बार और हेल्थ स्नैक्स महंगे हो रहे हैं।
Protein Powder Price: कुछ साल पहले तक प्रोटीन पाउडर सिर्फ जिम जाने वालों की चीज माना जाता था। अब तस्वीर बदल चुकी है। कॉलेज जाने वाले युवा हों, ऑफिस जाने वाले प्रोफेशनल्स या फिटनेस को लेकर जागरूक परिवार, हर कोई अपनी डाइट में प्रोटीन बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अब यही हेल्थ ट्रेंड लोगों की जेब पर भारी पड़ने लगा है। भारत में प्रोटीन फूड्स और सप्लीमेंट्स तेजी से महंगे हो रहे हैं। वजह सिर्फ घरेलू मांग नहीं, बल्कि दुनिया भर में पैदा हुआ सप्लाई संकट है। Whey यानी प्रोटीन पाउडर का सबसे अहम कच्चा माल अब रिकॉर्ड कीमतों पर पहुंच गया है। इसका असर प्रोटीन पाउडर, हाई-प्रोटीन बार, स्मूदी और हेल्थ स्नैक्स बेचने वाली कंपनियों पर साफ दिखाई दे रहा है।
इंडस्ट्री से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, थोक में Whey Concentrate की कीमत 2023-24 में करीब 700 रुपये प्रति किलो थी। अब यही कीमत बढ़कर 2,700 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। वहीं, जो प्रीमियम Whey Isolate पहले थोक में करीब 800 रुपये किलो मिलता था, उसकी कीमत अब 3,600 रुपये प्रति किलो तक जा पहुंची है। यानी हालत ऐसी हो गई है कि फिटनेस का शौक अब पहले से कहीं ज्यादा महंगा पड़ रहा है।
The Whole Truth, Yoga Bar और MuscleBlaze जैसी कंपनियां पिछले कुछ महीनों में अपने प्रोटीन प्रोडक्ट्स की रिटेल कीमतें 10 से 25 फीसदी तक बढ़ा चुकी हैं। कुछ प्रोडक्ट्स तो 2023-24 के मुकाबले 40 फीसदी तक महंगे हो गए हैं। पहले जो एक किलो Whey Protein करीब 2,000 रुपये में मिल जाता था, अब उसकी कीमत 3,500 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं, Whey Isolate करीब 4,500 रुपये किलो बिक रहा है।
एक स्कूप प्रोटीन की कीमत भी बढ़कर करीब 100-120 रुपये तक पहुंच चुकी है, जबकि 2024 में यह करीब 80 रुपये पड़ती थी। कंपनियों का कहना है कि आने वाले महीनों में यह खर्च और बढ़ सकता है।
भारत में इस्तेमाल होने वाला करीब 90 फीसदी Whey विदेशों से आता है, खासकर यूरोप से। अब वहां सप्लाई पर कई तरह का दबाव बन गया है। एक तरफ दुनिया भर में हाई-प्रोटीन डाइट का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। दूसरी तरफ वजन घटाने वाली GLP-1 दवाओं के बढ़ते इस्तेमाल ने भी प्रोटीन की मांग अचानक बढ़ा दी है। डॉक्टर इन दवाओं का इस्तेमाल करने वालों को ज्यादा प्रोटीन लेने की सलाह दे रहे हैं। इसके अलावा भू-राजनीतिक तनाव, रेड सी संकट और शिपिंग दिक्कतों ने ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ा दिया है। रुपये की कमजोरी ने भी आयात करने वाली भारतीय कंपनियों की परेशानी बढ़ाई है।
भारत का प्रोटीन बाजार अभी शुरुआती दौर में है और यहां ग्राहक कीमत को लेकर काफी संवेदनशील हैं। इसलिए कंपनियां चाहकर भी पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पा रहीं। कई कंपनियां मार्केटिंग खर्च कम कर रही हैं, ऑपरेशन कॉस्ट घटा रही हैं और मुनाफा कम करके काम चला रही हैं, ताकि ग्राहक पूरी तरह दूर न भागें। लेकिन इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो अगले 6 महीनों में सप्लाई की दिक्कत और बढ़ सकती है।
प्रोटीन बार और हेल्थ स्नैक्स बनाने वाली कंपनियों को दूसरी तरफ से भी झटका लग रहा है। ड्राई फ्रूट्स, कोको और पैकेजिंग सामग्री की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। कुछ कंपनियों का कहना है कि पिस्ता करीब 70 फीसदी तक महंगा हो गया है, जबकि कोको की कीमत में भी बड़ा उछाल आया है।
बढ़ती लागत के बीच कई कंपनियां अब प्लांट प्रोटीन (Plant Protein) और यीस्ट प्रोटीन (Yeast Protein) जैसे विकल्पों पर जोर दे रही हैं। हालांकि, फिटनेस एक्सपर्ट्स मानते हैं कि स्वाद और टेक्सचर के मामले में Whey Protein अभी भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। इसलिए कंपनियां अब ऐसे प्रोटीन ब्लेंड बनाने पर काम कर रही हैं, जिनमें लागत भी कम हो और स्वाद भी बेहतर रहे।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भारत लंबे समय तक आयात पर निर्भर नहीं रह सकता। देश में चीज प्रोडक्शन अभी कम है और Whey उसी का बाय-प्रोडक्ट होता है। कुछ भारतीय कंपनियां अब लोकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं, लेकिन बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू होने में अभी समय लगेगा।