
Marigold Protein (Photo- gemini ai)
Genda Phool Benefits: गेंदा का फूल (Marigold) हम सबने पूजा, शादी या त्योहारों में खूब इस्तेमाल होते देखा है। लेकिन अब यही साधारण सा फूल साइंस की दुनिया में खास बनता जा रहा है। हाल ही में ACS Food Science and Technology में छपी एक रिसर्च के मुताबिक, वैज्ञानिक गेंदा के फूल को एक नए प्रोटीन सोर्स के तौर पर देख रहे हैं।
गेंदा का वैज्ञानिक नाम Calendula officinalis है। अभी तक इसका इस्तेमाल ज्यादातर सजावट और पूजा-पाठ में होता है, लेकिन अब रिसर्च बताती है कि इसमें अच्छी मात्रा में प्रोटीन और पोषक तत्व भी मौजूद हैं।
इस स्टडी में पाया गया कि गेंदा के फूल में लगभग 20-27% तक प्रोटीन होता है, जो काफी अच्छा माना जाता है। इतना ही नहीं, इसमें जरूरी अमीनो एसिड, फ्लेवोनॉयड्स और फेनोलिक्स जैसे तत्व भी पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने गेंदा के फूल से अलग-अलग तरह के प्रोटीन निकाले, जिनमें एल्ब्यूमिन सबसे ज्यादा मात्रा में पाया गया। इस प्रोटीन की खास बात ये है कि यह शरीर में अच्छे से काम करता है और फूड इंडस्ट्री में इस्तेमाल हो सकता है।
आजकल दुनिया में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है और खाने-पीने के संसाधनों पर दबाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में वैज्ञानिक नए-नए प्रोटीन सोर्स खोज रहे हैं। गेंदें के फूल इस मामले में इसलिए खास है क्योंकि इसे उगाना आसान है। इसमें ज्यादा पानी या संसाधन नहीं लगते, यह जल्दी तैयार हो जाता है। इसके अलावा, पूजा और सजावट के बाद जो फूल फेंक दिए जाते हैं, उन्हें भी दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे वेस्ट कम होगा और नया न्यूट्रिशन सोर्स मिलेगा।
आने वाले समय में गेंदें के फूल को प्रोटीन पाउडर, हेल्थ सप्लीमेंट, प्लांट-बेस्ड फूड जैसे प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।
यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है अभी गेंदें के फूल खाने के लिए पूरी तरह से सुरक्षित या आम इस्तेमाल में नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले इसकी पूरी सेफ्टी टेस्टिंग जरूरी है। बाजार में आने से पहले नियमों की मंजूरी चाहिए। घर में पूजा वाला फूल खाना सही नहीं है, क्योंकि उसमें केमिकल या कीटनाशक हो सकते हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
06 May 2026 01:17 pm
Published on:
06 May 2026 12:18 pm
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