
OTT सब्सक्रिप्शन लेने के बजाए इनवेस्टमेंट करना बेहतर है। (PC: X post)
Personal Finance: OTT प्लेटफॉर्म्स के सब्सक्रिप्शन के लिए हर महीने होने वाली 149 या 299 रुपए की कटौती इतनी छोटी लगती है कि ज्यादातर लोग इस पर ध्यान ही नहीं देते। आज के दौर में नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम और जियो-हॉटस्टार जैसे OTT प्लेटफॉर्म्स का सब्सक्रिप्शन लेना एक आम आदत बन गई है। लेकिन CA नितिन कौशिक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए बताया है कि यही छोटी सी रकम कैसे आपकी दौलत को चुपचाप खाती रहती है।
ईटी की एक रिपोर्ट में Ormax और FICCI EY के हवाले से बताया गया कि भारत में अब 143 मिलियन यानी (14.30 करोड़) से ज्यादा पेड OTT सब्सक्रिप्शन हो चुके हैं। साथ ही यह भी बताया कि ज्यादातर घरों में एक साथ कई प्लेटफॉर्म चलते हैं। एक सामान्य सेटअप में नेटफ्लिक्स स्टैंडर्ड 499 रुपए प्रति माह यानी 5,988 रुपये सालाना, अमेजन प्राइम 1,499 रुपए सालाना और जियो-हॉटस्टार प्रीमियम 1,499 रुपए सालाना पर मिलता है। इन तीनों को जोड़ दें तो सालाना खर्च करीब 9,000 रुपए हो जाता है। इसमें एक भी म्यूजिक या रीजनल स्ट्रीमिंग ऐप जुड़ जाए तो यह रकम आसानी से 10,000 रुपए सालाना पार कर जाती है।
CA नितिन कौशिक ने अपनी पोस्ट में बताया कि आमतौर पर एक भारतीय औसतन हर साल OTT प्लेटफॉर्म्स पर करीब 8,400 रुपए खर्च करता है। यानी हर महीने करीब 700 रुपए। पहली बार में यह रकम बेहद मामूली लगती है। लेकिन अगर इसी 700 रुपए को हर महीने किसी इंडेक्स फंड में 12 फीसदी सालाना रिटर्न के हिसाब से निवेश किया जाए, तो 10 साल में यह करीब 1.6 लाख रुपए, 15 साल में करीब 3.5 लाख रुपए और 20 साल में करीब 6.4 लाख रुपए बन सकती है। कौशिक ने अपनी पोस्ट में लिखा कि आप किसी प्लेटफॉर्म को सिर्फ 700 रुपए महीना नहीं दे रहे, बल्कि आप उसे भविष्य की पूंजी सौंप रहे हैं।
OTT प्लेटफॉर्म्स जानबूझकर ऑटो-डेबिट और रिकरिंग बिलिंग का सिस्टम बनाते हैं। कौशिक के मुताबिक इन प्लेटफॉर्म्स पर यूजर चर्न रेट यानी सब्सक्रिप्शन छोड़ने की दर 30 से 40 फीसदी तक होती है। इसलिए कंपनियां प्राइसिंग मॉडल इस तरह का बनाती है कि अगर यूजर उसे यूज न भी करे तो भी पैसे कटते रहते हैं। यह खर्च इतना मामूली लगता है कि लोगों को तब तक पता नहीं चलता जब तक नुकसान बड़ा न हो जाए।
कई बार ऐसा होता है कि यूजर एक से ज्यादा सब्सक्रिप्शन ले लेता है। लेकिन इन सभी का फायदा उठाने के लिए उसके पास समय नहीं होता। इसका नतीजा यह होता है कि यूजर ऐसे कंटेंट पर पैसा खर्च कर रहा होता है, जिसका असल में वह उपयोग ही नहीं करता।
इस समस्या से निपटने के लिए कुछ आसान सुझाव निम्न हैं:
कौशिक का मूल संदेश यही है कि अगर आप इन माइक्रो लीक्स पर ध्यान दें और उसी रकम को स्मार्ट तरीके से निवेश करें, तो बिना सैलरी बढ़ाए भी लंबे समय में बड़ी दौलत बनाई जा सकती है। वेल्थ बनाने के लिए ज्यादा सैलरी होना जरूरी नहीं है बल्कि छोटे-छोटे ऐसे खर्चों को कम करना जरूरी है जो काम भी नहीं आते।
Updated on:
23 May 2026 10:22 am
Published on:
23 May 2026 10:19 am
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