कारोबार

अगले महीने घट जाएगा FD पर मिलने वाला ब्याज? RBI की बैठक में होना है Repo rate पर फैसला

Will FD interest rates decrease: पिछली बार जब आरबीआई ने रेपो रेट में कटौती की थी, तो बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाला ब्याज भी घटा दिया था।

2 min read
Jan 20, 2026
अगले महीने आरबीआई की बैठक है। (PC: AI)

RBI MPC meeting February: अगले महीने क्या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाले ब्याज में कमी आएगी? यह सवाल इसलिए खड़ा हुआ है, क्योंकि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक फरवरी में होनी है। अगर आरबीआई रेपो रेट में कटौती का फैसला लेता है, तो एक बार फिर से बैंक FD पर ब्याज को कम कर सकते हैं। पिछली बार जब रेपो रेट में कमी हुई थी, तो बैंकों ने तुरंत ही FD पर मिलने वाले ब्याज को कम करना शुरू कर दिया था। रेपो रेट में कटौती से जहां लोन सस्ते हो जाते हैं। वहीं, फिक्स्ड डिपॉजिट का ब्याज अमूमन घट जाता है।

ये भी पढ़ें

Gold Rate Today: सोने-चांदी की कीमतों में फिर लगी ‘आग’, Silver के दाम 11 हजार से अधिक चढ़े

4-6 फरवरी को है बैठक

आरबीआई की बैठक 4 से 6 फरवरी तक चलेगी। इस तीन दिवसीय बैठक में नीतिगत ब्याज दरों पर फैसला होगा। दिसंबर की बैठक में RBI ने रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट घटाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया था। इससे जहां लोन सस्ते हुए, लोगों का EMI का बोझ कुछ कम हुआ। वहीं, बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाले ब्याज को भी घटा दिया। दरअसल, रेपो रेट में कटौती से बैंकों को आरबीआई से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है। नतीजतन उन्हें लोन सस्ते करने होते हैं। ऐसी स्थिति में वह FD पर मिलने वाला ब्याज घटा देते हैं। दिसंबर में आरबीआई की बैठक के बाद अधिकांश बैंकों ने अपने फिक्स्ड डिपॉजिट रेट्स में बदलाव किए थे।

क्या है क्रिसिल का अनुमान?

वैसे, क्रेडिट रेटिंग और रिसर्च कंपनी क्रिसिल (Crisil) का अनुमान है कि आरबीआई फरवरी में होने वाली बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा। नीतिगत ब्याज दरों को यथावत रखा जा सकता है। क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि महंगाई में बढ़ोतरी को देखते हुए हमें उम्मीद है कि RBI पॉलिसी रेट्स में कोई बदलाव नहीं करेगा। रिटेल महंगाई नवंबर में 0.71% से बढ़कर दिसंबर में 1.33% हो गई थी। हालांकि, यह अभी भी RBI के 2-4 प्रतिशत के टारगेट रेंज से नीचे है। इसके बावजूद क्रिसिल का अनुमान है कि रिजर्व बैंक नीतिगत ब्याज दरों से कोई छेड़छाड़ नहीं करेगा।

GDP ग्रोथ हो सकती है धीमी

क्रिसिल का यह भी कहना है कि अगले वित्त वर्ष में भारत की GDP ग्रोथ कुछ कम होकर 6.7 प्रतिशत रह सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनौतीपूर्ण ग्लोबल ट्रेड के चलते भारत की विकास दर कुछ धीमी हो सकती है। रेटिंग एजेंसी का यह भी मानना है कि रिटेल महंगाई मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 में अनुमानित 2.5 प्रतिशत से बढ़कर अगले वित्त वर्ष 2026-27 में 5.0 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। मालूम हो कि महंगाई को नियंत्रित रखना आरबीआई की जिम्मेदारी है। इसके लिए रिजर्व बैंक का सबसे पसंदीदा हथियार है रेपो रेट में बढ़ोतरी, पूर्व में इसी हथियार के इस्तेमाल से आरबीआई ने लोन महंगे कर दिए थे।

Repo Rate और FD का रिश्ता

रेपो रेट और FD रेट्स का कोई सीधा जुड़ाव नहीं है। बैंक अपनी जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव करते हैं। बैंकों को अपनी दैनिक गतिविधियों के लिए पैसों की जरूरत होती है और इसलिए वह ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर ज्यादा ब्याज ऑफर करते हैं। ग्राहकों के पैसों से बैंक अपनी गतिविधियों को अंजाम देते हैं और अच्छे ब्याज से ग्राहक भी खुश रहते हैं। जब रेपो रेट में कटौती होती है, तो बैंकों को RBI से सस्ते में कर्ज मिल जाता है। उन्हें ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए FD पर ज्यादा ब्याज देने की जरूरत नहीं रहती। इसलिए वे तुरंत ब्याज दरें कम करने लगते हैं। अगर फरवरी में भी रेपो रेट में कमी होती है, तो FD की ब्याज दरें भी कम हो सकती हैं।

ये भी पढ़ें

Budget 2026: बिहार के बाद अब बंगाल की बारी, ममता की कुर्सी के लिए बजट को हथियार बनाएगी BJP!

Updated on:
20 Jan 2026 01:28 pm
Published on:
20 Jan 2026 01:26 pm
Also Read
View All

अगली खबर