सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने हाल में नोटिफिकेशन जारी किया है। अब वर्तमान में चल रहे वाहनों में हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक सिस्टम फिटमेंट किया जाएगा।
पेट्रोल और डीजल के दाम तेजी से बढ़ते जा रहे हैं और इनसे चलने वाले वाहन प्रदूषण भी अधिक करते हैं। इनके विकल्प के तौर पर सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन ही ज्यादा किफायती साबित हो सकते हैं और इससे प्रदूषण भी नहीं होगा। जी हां अब सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने हाल में नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें मोटर व्हीकल्स एक्ट 1989 में संशोधन करने के बारे में बताया है। अब वर्तमान में चल रहे वाहनों में हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक सिस्टम के रेट्रो फिटमेंट को मंजूरी दी जाएगी। आइए जानते हैं क्या है सरकार का प्लान ।
इस रेट्रो फिटमेंट को 3 अलग-अलग कैटेगरियों में बांटा जाएगा। ये AIS-123 स्टैंडर्ड्स की जरूरतों को भी पूरा करेगा। अगर डीजल और पेट्रोल वाहनों में ये हाइब्रिड सिस्टम लगा दिया जाएगा तो उससे वाहन को चलाने का खर्च 50 प्रतिशत से भी कम हो जाएगा। ये हैं तीन कैटेगरियां
पहली कैटेगरी-
यात्री कार, छोटे सामान ले जाने वाले वाहन और 3500 किलो से कम वजन वाले वाहनों में हाइब्रिड सिस्टम लगाया जा सकता है।
दूसरी कैटेगरी-
3500 किलो से ज्यादा वजन वाले वाहनों में ये सिस्टम लगाया जा सकता है।
तीसरी कैटेगरी-
इसके जरिए मोटर वाहनों को इलेक्ट्रिक ऑपरेशन में तब्दील करना है, जिसके जरिए इसमें इंजन को बदला जाएगा।
इस सिस्टम में कारों के अंदर इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड मोटर लगाई जाती हैं और बैटरी फिट की जाती हैं। रेट्रोफिटिंग के बाद कार ईंधन के साथ-साथ बिजली से भी चल सकती है। बाजार में केपीआईटी टेक्नोलॉजी ने रेवोलो नाम का एक प्रोडक्ट तैयार किया है। इसमें एक इलेक्ट्रिक मोटर होती है जो कि इंजन फैन बेल्ट से कनेक्ट की जाती है। इसे लगाने के बाद खर्च वाहन चलाने का खर्च 60 फीसदी कम हो जाता है।
कितना आएगा खर्च
इस सिस्टम को किसी छोटी कार में लगाने के लिए लगभग 80,000 रुपये का खर्च होगा। वहीं अगर किसी एसयूवी या बड़ी सेडान में इसे लगाया जाएगा तो उसका खर्च लगभग 1 लाख रुपये तक हो सकता है।