Second Hand Cars In India: सैकेंड हैंड गाड़ियां धीरे-धीरे भारत में लोकप्रियता हासिल कर रही हैं। साथ ही ग्राहकों का भी इनके लिए भरोसा पहले से ज़्यादा बढ़ा है।
एक समय था, जब भारत में लोग सैकेंड हैंड कार यानि की पहले इस्तेमाल की हुई कार को खरीदना पसंद नहीं करते थे। पर अब ऐसा नहीं है। समय के साथ ग्राहकों की सैकेंड हैंड कार के लिए विचारधारा बदली है। सैकेंड हैंड कार धीरे-धीरे देश में लोकप्रिय हो रही हैं। साथ ही ग्राहकों का भी इनके लिए भरोसा पहले से ज़्यादा बढ़ा है। पिछले कुछ सालों में सैकेंड हैंड कार के मार्केट में तेज़ी देखने को मिली है। रिपोर्ट के अनुसार 2021 के वित्तीय साल के अंत के समय देश में सैकेंड हैंड गाड़ियों की करीब 40 लाख यूनिट्स थी। और इस बात की संभावना है कि इस वित्तीय वर्ष तक यह आंकड़ा करीब 82 लाख तक पहूंच सकता है।
सैकेंड हैंड गाड़ियों की बढ़ती लोकप्रियता का मुख्य कारण
सैकेंड हैंड गाड़ियों की बढ़ती लोकप्रियता का मुख्य कारण पिछले कुछ सालों में नई गाड़ियों की कीमत में लगातार बढ़ोत्तरी है। साथ ही पेट्रोल-डीज़ल की आसमान छूती कीमत भी किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में सैकेंड हैंड गाड़ियों के कम कीमत में उपलब्ध होने के कारण इनका मार्केट तेज़ी से बढ़ा है, जो आने वाले समय में और तेज़ी से बढ़ेगा।
छोटे शहरों में ज़्यादा लोकप्रिय
बड़े शहरों के मुकाबले, छोटे शहरों में सैकेंड हैंड गाड़ियों की लोकप्रियता ज़्यादा है। कम कीमत पर उपलब्धता के कारण छोटे शहर में रहने वाले लोगों का सैकेंड हैंड गाड़ियों पर भरोसा भी तेज़ी से बढ़ रहा है।
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आसान प्रोसेस और कम झंझट
सैकेंड हैंड गाड़ियों को खरीदने का प्रोसेस आसान होता है। साथ ही नई गाड़ियों की तरह सैकेंड हैंड गाड़ियों पर ऊंचा टैक्स, डेप्रिसिएशन, रजिस्ट्रेशन चार्ज, RTO फीस, महंगी पॉलिसी जैसे खर्चों का भी झंझट नहीं रहता, जिससे ग्राहकों को ज़्यादा सुविधा रहती है।
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