
हम भारतीय हमेशा से अपने लिए एक सस्ते और शानदार विकल्प की तलाश में रहते हैं, फिर चाहे वह घर खरीदना हो या कार। भारत में बीते कुछ सालों से इस्तेमाल की गई कार (Used cars ) का मार्केट बूम पर है। रिपोर्ट की मानें तो यूज्ड कार बाजार वित्त वर्ष 2011 और वित्त वर्ष 2026 के बीच 15 प्रतिशत के इजाफे के साथ एक बड़े उछाल का गवाह बन सकता है। BS6 उत्सर्जन मानदंड और स्क्रैपेज पॉलिसी जैसे कई बदलावों ने पुरानी कारों की मांग में वृद्धि कर दी है। लोग आज अगर कार को खरीदने का प्लान बनाते हैं, तो वे यूज्ड कार पर एक नजर जरूर डालते हैं। इस उम्मीद में कि उन्हें एक बेहतर विकल्प मिल जाए।
सेकेंड-हैंड वाहन अब पुरानी सोच के साथ बदल चुके हैं, अब आपको कोई पुरानी कार खरीदने पर ये नहीं कहेगा कि ये तो यूज्ड कार है। क्योंकि कार की कंडीशन कुछ इस तरह होती है, कि ये एकदम नई लगती हैं। एंट्री-लेवल यूज्ड कारों को दोपहिया वाहनों की तुलना में अधिक सुरक्षित माना जाता है। क्योंकि कार में दोपहिया वाहन के मुकाबले दुर्घटनाओं की संभावना कम होती है। इसलिए पुरानी कारों की खरीदारी की ओर रुझान बढ़ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप ग्राहकों की संख्या बढ़ रही है।
पुरानी कारों को खरीदने के पीछे सबसे बड़ी वजह है, इनकी कीमत। आज कई वाहन निर्माता कंपनियां यूज्ड कार बाजार में मौजूद हैं, और इनकी बदौलत पुरानी कारों पर लोगों का विश्वास बढ़ गया है। पहले आप डीलर से पुरानी कार खरीदते थे, जिसपर विश्वास करना मुश्किल होता था। लेकिन अब यूज्ड कार मार्केट में मौजूद कंपनियां ना सिर्फ आपको बढ़िया विकल्प तलाशने में मदद करती हैं, बल्कि पुराने वाहनों पर लोन से लेकर इंश्योरेंस तक की भी गारंटी देती हैं।
दिल्ली एनसीआर में पुरानी पेट्रोल और डीजल कारों पर रोक लगने के बाद लोगों ने दिल्ली रजिस्टर्ड नंबर गाड़ियों को सेल करना शुरू कर दिया है, और इस क्रम में लग्जरी कारों ने मार्केट में अपनी पकड़ बना ली है। आप देखेंगे कि लग्जरी कारों को कुछ विक्रेता 8 से 10 लाख की कीमत पर भी सेल करते हैं, यानी हैचबैक की कीमत पर आप लग्जरी कारों को खरीद सकते हैं। क्योंकि लग्जरी वाहन मालिक अपनी कारों को स्क्रैप करने के बजाय बेचने का विकल्प अपना रहे हैं।