जैसे सीट बेल्ट का फीचर इंसानों की सेफ्टी के लिए दिया गया है, लेकिन लोगों को इसे फॉलो करने में भी आलस आता है।
कार वैसे तो इंसान की सुविधा के लिए बनी है ताकि धूप और बारिश से बचकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर कम समय में पहुंचा जा सके, लेकिन जब एक्सीडेंट हो जाता है तो यही कार इंसान के लिए जानलेवा साबित हो जाती है। इसको देखते हुए ऑटोमोबाइल कंपनियां कारों में सेफ्टी फीचर्स देती हैं ताकि एक्सीडेंट होने पर अंदर बैठे व्यक्तियों को कोई नुकसान न पहुंचे। भारत एक ऐसा देश है जहां पर नियम बने तो हुए हैं, लेकिन उन्हें कोई मानना नहीं चाहता है। जी हां फ्रंट पर बैठे लोग तो सीट बेल्ट पहन लेते हैं, लेकिन रियर सीट्स पर बैठे लोगों को सीट बेल्ट पहनने में शर्म आती है। सीट बेल्ट न पहनने के अलग-अलग कारण हैं...
शर्म आती है...
सीट बेल्ट न पहनने के पीछे कुछ लोगों को कहना है कि उन्हें पीछे वाली सीट पर बैठकर सीट बेल्ट पहनने में शर्म आती है, क्योंकि उन्हें लगता है कि लोग सोचेंगे कि कितना डरपोक है देखो, पीछे भी सीट बेल्ट पहनकर बैठा हुआ है। खासतौर पर युवाओं को सीट बेल्ट पहनने में ज्यादा शर्म आती है।
बीमारी का बहाना...
सीट बेल्ट न पहनने के पीछे कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें सीट बेल्ट पहनने से दिक्कत होती है, जैसे पेट में दर्द, सीने में दर्द या अन्य किसी तरह की दिक्कत होती है।
कपड़े खराब हो जाते हैं...
जी हां कुछ लोगों का कहना है कि सीट बेल्ट पहनने से कपड़े खराब हो जाते हैं। सीट बेल्ट से कपड़ों की प्रेस खराब हो जाती है और सीट बेल्ट गंदी होती है इसलिए कपड़े गंदे हो जाते हैं।
नियम-कानून...
सबसे बड़ी बात तो ये है कि पीछे वाली सीट पर बैठकर सीट बेल्ट पहनने का भारत में कोई भी नियम नहीं बना है यानी कि अगर आप रियर सीट बेल्ट नहीं पहनते हैं तो आपका कोई चालान भी नहीं कटेगा।
हम सभी पाठकों यही सलाह देंगे कि जान की कीमत किसी भी चीज से बहुत ज्यादा है, चाहे कपड़े खराब हों या बाल खराब हों या फिर लोग डरपोक समझें, लेकिन यात्रा करते वक्त हमेशा सीट बेल्ट जरूर पहने।