चंडीगढ़ पंजाब

पंजाब में गुरूग्रंथ साहिब के अपमान और सिखों पर पुलिस फायरिंग के मामलों की जांच सीबीआई से वापस ली जाएगी

रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर पूर्व अकाली दल की सरकार के नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के मुद्ये पर सत्तारूढ कांग्रेस व आम आदमी पार्टी सहमत थे...

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PUNJAB ASSEMBLY

(चंडीगढ): पंजाब विधानसभा में मंगलवार को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर प्रदेश में हुई गुरूग्रंथ साहिब के अपमान की घटनाओं और इस पर विरोध प्रदर्शन करते सिखों पर फायरिंग के मामलों की जांच सीबीआई से वापस लेने का फैसला किया गया। प्रस्ताव में संकल्प व्यक्त किया गया कि इन मामलों की जांच राज्य सरकार द्वारा गठित की जाने वाली एसआईटी से कराई जाएगी। प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने कहा कि एसआईटी से समयबद्ध जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।

गुरूग्रंथ साहिब के अपमान की घटनाओं और सिखों पर पुलिस फायरिंग के मुद्दे पर जस्टिस-रिटायर्ड रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट पर सदन में करीब आठ घंटे लम्बी बहस के बाद ग्रामीण विकास और पंचायतराज मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने गुरूग्रंथ साहिब के अपमान और सिखों पर पुलिस फायरिंग की घटनाओं की जांच सीबीआई से वापस लेकर एसआईटी से जांच कराने के संकल्प का प्रस्ताव सदन में पेश किया गया। यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।

सदन में उस समय सत्तारूढ कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल आम आदमी पार्टी के सदस्य मौजूद थे। लेकिन अकाली-भाजपा गठबंधन के सदस्यों ने रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट में अकाली दल को टारगेट किए जाने और रिपोर्ट को कूटरचित बताते हुए सदन की कार्यवाही का बायकाट किया। गठबंधन के सदस्यों ने प्रश्नकाल समाप्त होते ही वैल में आकर पोस्टर लहराते हुए हंगामा किया। इसके बाद वे सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वाकआउट कर गए। इसके बाद वे सदन में नहीं लौटे और बाहर माॅक विधानसभा चलाते रहे।

रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर पूर्व अकाली दल की सरकार के नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के मुद्ये पर सत्तारूढ कांग्रेस व आम आदमी पार्टी सहमत थे। मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने पहले कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर आगे की जांच सीबीआई को सौंपने का ऐलान किया था। आम आदमी पार्टी और सिख संगठनों के नेताओं ने सीबीआई जांच का विरोध किया था। सदन में मंगलवार को रिपोर्ट पर बहस के दौरान सत्तारूढ दल के सभी सदस्यों ने अपनी सरकार से मांग की कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की जांच सीबीआई के बजाय राज्य पुलिस से ही करवाई जाए। मामलों की आगे जांच राज्य पुलिस से कराने के मुद्दे पर सदन एकराय था। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन की भावनाओं का सम्मान करते हुए सभी मामले सीबीआई से वापस लेते हुए राज्य की एसआईटी से समयबद्ध जांच करवाई जायेगी और दोषी पाये जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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Published on:
29 Aug 2018 05:09 pm
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