हंगामे के बीच ही मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने दखल किया और कहा कि वर्ष 1984 में सिख विरोधी हिंसा हुई तब उसमें कांग्रेस के सदस्य व्यक्तिगत शामिल थे...
चंडीगढ पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र की दूसरे दिन की बैठक में सोमवार को हंगामा हुआ। आम आदमी पार्टी के सुखपाल खैहरा गुट और अकाली-भाजपा गठबंधन के सदस्यों ने अपने-अपने मुद्दों को लेकर वाकआउट किया। सदन में नारेबाजी ने माहौल को गरमाया लेकिन स्पीकर ने कोई नारा रिकाॅर्ड न करने का निर्देश दिया। एक समय ऐसा आया कि हंगामा बेकाबू होता देख स्पीकर ने सदन की कार्यवाही आधा घंटे के लिए स्थगित कर दी।
दूसरे दिन की बैठक में सदन में हंगामा होने के आसार पहले ही दिखाई दे रहे थे। अकाली दल के नेता सुखवीर बादल और विक्रम सिंह मजीठिया समेत विधायक सदन के बाहर रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट को कूटरचित बताते हुए प्रदर्शन कर रहे थे। इसके लिए उन्होंने अपने हाथों में व्यंग्य प्रदर्शन करने के लिए होर्डिंग्स भी लिए हुए थे। आयोग की रिपोर्ट को जानबूझकर लीक करने का आरोप लगाते हुए अकाली दल नेता रिपोर्ट के पेज हवा में उडा रहे थे।
सदन में प्रश्नकाल शांतिपूर्वक गुजर गया। लेकिन शून्यकाल शुरू होते ही हंगामा शुरू हो गया। शून्यकाल आते ही आम आदमी पार्टी के विधायक और पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने किसानों की आत्महत्या के मुद्दे पर सदन की कमेटी की रिपोर्ट पर चर्चा कराने की मांग उठा दी। वैल में देर तक नारेबाजी करने के बाद सुखपाल खैहरा की अगुवाई में उनके समर्थक आठ विधायक और उनके समर्थक लोक इंसाफ पार्टी के विधायक सिमरजीत सिंह बैंस व बलविंदर सिंह बैंस वाकआउट कर गए। इसके बाद अकाली दल के सदस्य पूर्व मंत्री विक्रम मजीठिया ने समाचारपत्र की प्रतियां लहराते हुए मुद्दा उठाया कि राहुल गांधी ने कहा है कि सिख संहार में कांग्रेस पार्टी लिप्त नहीं थी। अकाली सदस्य राहुल का यह बयान दिखाने के लिए समाचारपत्र की प्रतियां लहराते हुए सदन के वैल में आ गए।
हंगामे के बीच ही मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने दखल किया और कहा कि वर्ष 1984 में सिख विरोधी हिंसा हुई तब उसमें कांग्रेस के सदस्य व्यक्तिगत शामिल थे। पार्टी के रूप में कांग्रेस इस हिंसा में शामिल नहीं थी। इस पर सुखवीर बादल ने जवाब दिया कि एक कांग्रेस नेता को उनके स्टिंग में यह कहते सुना गया है कि हिंसा के दौरान दिल्ली में उन्होंने अपनी कार में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को घुमाया था। कांग्रेस ने इसी सिलसिले में कुछ कांग्रेस नेताओं के टिकट काटे। इस बहस के बीच ही अकाली दल और भाजपा के सदस्य वैल में आ गए। आम आदमी पार्टी के ही सदस्य और पूर्व नेता प्रतिपक्ष एचएस फूलका ने कहा कि सिख संहार के दौरान दिल्ली में पांच हजार फौज मौजूद थी लेकिन बचाव की कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस दौरान फूलका के नेतृृत्व में आम आदमी पार्टी के विधायक नारेबाजी करते हुए वैल में आ गए। लेकिन सुखपाल खैहरा गुट ने उनका साथ नहीं दिया। इस हंगामे के साथ ही अकाली-भाजपा सदस्य भी सदन से वाकआउट कर गए।
बाद में सदन में अकाली दल सदस्य और पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा ने रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट लीक होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पार्टी ने स्पीकर को इस मामले में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था। रिपोर्ट सदन में पेश किए जाने से पहले लीक की गई। यह सदन के विशेषाधिकार का हनन है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट कुछ चुनिंदा लोगों को लीक की गई। सुखवीर बादल ने कहा कि सिख धार्मिक उपदेशक बलजीत सिंह डडूवाल मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचे थे। जब मीडियाने उनसे मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचने के बारे में टिप्पणी पूछी तो उन्होंने कहा कि मेरी गाडी आवास के अंदर गई थी मैं नहीं गया।
सुखवीर के इस दावे के जवाब में मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री आवास के चारों ओर सीसीटीवी लगे है। इनकी जांच करवा ली जाए। यदि कोई प्रमाण नहीं मिला तो यह सदन को गुमराह करने का मामला बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर वे डडूवाल को नहीं जानते। उन्होंने कहा कि रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट पर सदन में मंगलवार को चर्चा कराना तय की लिया है तो आज हंगामा क्यों किया जा रहा है? इसी बीच सुखवीर बादल और शहरी निकाय मंत्री नवजोत सिद्धू के बीच नोंक-झोंक होने लगी। जब हंगामा बहुत बढ गया तो स्पीकर राणा केपी ने सदन की कार्यवाही आधा घंटा स्थगित कर दी।