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पार्टी के रूप में कांग्रेस सिख संहार में लिप्त नहीं थीः अमरिंदर

राहुल गांधी ने कहा था कि 1984 का सिख संहार एक दर्दनाक दुर्घटना थी और...

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(चंडीगढ): पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बचाव में आए और कहा कि पार्टी के रूप में कांग्रेस सिख संहार में लिप्त नहीं थी। राहुल गांधी ने इससे पहले लंदन में कहा था कि सिख संहार में कांग्रेस लिप्त नहीं थी और दोषियों को सजा मिलना चाहिए।

राहुल के इस बयान पर शिरोमणि अकाली दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखवीर बादल ने कडी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और कहा था कि नानावती कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सिख संहार में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता लिप्त थे। बादल ने कहा था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने सिख संहार पर कहा था कि जब बडा पेड गिरता है तो धरती हिलती ही है।

उन्होंने कहा कि कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस ने जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार को चुनाव में टिकट न देने का फैसला भी किया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सिख संहार के लिए कांग्रेस की ओर से माफी भी मांगी थी। जगदीश टाइटलर के एक स्टिंग में उन्हें यह कहते सुना गया है कि सिख संहार के दौरान उन्होंने राजीव गांधी को कार में सडकों पर घुमाया। साथ ही टाइटलर ने कहा कि सौ सिख तो मैंने ही मारे। बादल ने कहा था कि राहुल गांधी का यह बयान सिख समुदाय के घावों पर नमक मलने की तरह है कि वे इस नजरिए से सहमत नहीं है कि कांग्रेस पार्टी सिख संहार में लिप्त थी।

सुखवीर बादल के इस विस्तृत बयान पर ही मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने कहा कि सिख संहार में जो भी लिप्त रहा हो उसे फांसी पर लटकाया जाए। राहुल गांधी ने कहा था कि 1984 का सिख संहार एक दर्दनाक दुर्घटना थी। यह दर्दनाक अनुभव था। कहा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी इसमें लिप्त थी। मैं इससे सहमत नहीं हूं। हालांकि निश्चित ही हिंसा हुई और दुर्घटना हुई थी।

सुखवीर बादल की कडी आलोचना करते हुए अमरिंदर सिंह ने कहा कि जब आॅपरेशन ब्ल्यू स्टार और सिख संहार की घटनाएं हुई तब राहुल गांधी तो स्कूल में थे। राहुल गांधी को किसी बात के लिए दोषी ठहराना पूरी तरह बेतुका है। उन्होंने कहा कि यदि कोई लिप्त रहा है तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए। कुछ लोगों के अपराध के लिए पूरी पार्टी को दोष देना हास्यास्पद और सुखवीर बादल की राजनीतिक अपरिपक्वता का नमूना है।


वर्ष 1984 के सिख संहार पर राहुल गांधी के हाल के बयान को इसी मुद्ये पर उनके पूर्व बयान के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। पूर्व के बयान में राहुल गांधी ने स्वयं ही कुछ कांग्रेसजनों को नामजद किया था। उन्होंने कहा कि इसी मुद्ये पर डाॅ मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी द्वारा प्रकट किए गए खेद को समझने की परिपक्वता अकाली नेताओं में नहीं है। उनके बयान का मतलब यह नहीं कि उन्होंने सिख संहार में कांग्रेस का लिप्त होना स्वीकार किया है। राहुल गांधी के तो पलटने का सवाल ही नहीं है। राहुल गांधी पर हमला कर सुखवीर बादल ने देश और विदेश में बढती उनकी लोकप्रियता के प्रति अपना भय ही प्रकट किया है।