
Tamil Nadu Bypolls: धारापुरम और मदुरांतकम विधानसभा उपचुनाव के लिए रविवार शाम छह बजे प्रचार थम गया। प्रचार के अंतिम दिन सत्तारूढ़ टीवीके और विपक्षी डीएमके के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने धारापुरम में रोड शो के दौरान महिलाओं के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों को मुद्दा बनाते हुए विपक्ष को चेतावनी दी। वहीं, डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने महंगाई, बिजली दरों में बढ़ोतरी और जनता से जुड़े मुद्दों को चुनावी बहस के केंद्र में रखते हुए सरकार पर निशाना साधा।
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने धारापुरम में चुनाव प्रचार के दौरान डीएमके नेताओं पर महिलाओं के खिलाफ कथित तौर पर अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बहनों और बेटियों के सम्मान पर किसी भी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विजय ने रोड शो के दौरान मतदाताओं से अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में समर्थन देने की अपील भी की। मतदान से पहले उनके इस बयान को चुनावी माहौल में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दूसरी ओर, डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने महंगाई, बिजली की दरों में बढ़ोतरी और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मतदाताओं से सरकार के कामकाज और प्रदर्शन का आकलन करने के बाद मतदान करने की अपील की। दोनों प्रमुख दलों के शीर्ष नेताओं के बीच मतदान से ठीक पहले हुई इस जुबानी जंग से उपचुनाव का राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है।
धारापुरम और मदुरांतकम विधानसभा सीटों पर उपचुनाव दो महिला विधायकों के इस्तीफे के कारण हो रहा है। मदुरांतकम से मर्गदम कुमारवेल और धारापुरम से पी. सत्यभामा ने एआईएडीएमके छोड़कर टीवीके का दामन थाम लिया था। इसके बाद दोनों सीटें खाली हो गईं। टीवीके ने दोनों ही पूर्व विधायकों को उपचुनाव में फिर से अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं, चुनाव में एआईएडीएमके समेत अन्य दल भी मैदान में हैं और जमीनी स्तर पर प्रचार में जुटे रहे।
धारापुरम और मदुरांतकम विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि 8 अक्टूबर को वोटों की गिनती की जाएगी। चुनाव बहुकोणीय होने के कारण सभी प्रमुख दलों के बीच मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है। भारत निर्वाचन आयोग ने रविवार शाम छह बजे से शांत अवधि लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। यह अवधि मतगणना समाप्त होने तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार को किसी भी माध्यम से चुनाव प्रचार करने की अनुमति नहीं होगी।
इसके अलावा, संबंधित विधानसभा क्षेत्रों के निवासी नहीं होने वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों को भी शांत अवधि शुरू होने के बाद निर्वाचन क्षेत्र छोड़ना होगा।