Ooty and Kodaikanal Tourist : पर्यटकों के संदेह को दूर करते हुए तमिलनाडु सरकार ने कहा है कि पर्यटन क्षेत्रों ऊटी और कोडैकानल में सैलानियों के लिए कोई पाबंद नहीं है। हालांकि उनको मद्रास हाईकोर्ट की ओर से अनिवार्य किया गया ई-पास लेना होगा।
तमिलनाडु सरकार ने पर्यटकों के संदेह को दूर करते हुए रविवार को कहा है कि पर्यटन क्षेत्रों ऊटी और कोडैकानल में सैलानियों के लिए कोई पाबंद नहीं है। हालांकि उनको मद्रास हाईकोर्ट की ओर से अनिवार्य किया गया ई-पास लेना होगा। ई-पास आवेदन और प्राप्ति की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी जो सोमवार से शुरू हो जाएगी। यह ई-पास व्यवस्था 30 जून तक प्रभावी रहेगी।
एक आधिकारिक वक्तव्य में सरकार ने कहा कि पर्यटकों को किसी तरह की असुविधा नहीं हो इसलिए उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार epass.tnega.org पर ऑनलाइन आवेदन कर ई-पास प्राप्त किया जा सकता है। इन पर्यटन स्थलों पर ई-पास के जरिए आवाजाही पर किसी तरह की रोक-टोक नहीं होगी।
गर्मी के मौसम में ऊटी और कोडैकानल तमिलनाडु के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं और यहां न केवल तमिलनाडु बल्कि भारत के अन्य राज्यों और विदेशों से भी पर्यटक आते हैं। यह ध्यान में रखते हुए कि गर्मी के मौसम में उनका आगमन अधिक होता है, इसे नियमित करने के लिए मद्रास उच्च न्यायालय ने पर्यटकों से अपना विवरण, वाहन संख्या, आगमन की तारीख, रहने की अवधि और ठहरने का स्थान जैसी सूचनाएं पहले ही प्रस्तुत करने को कहा है। सैलानियों को यह विवरण वेबसाइट के माध्यम से उपलब्ध कराते हुए ई-पास के लिए आवेदन करना होगा। इस भरे गए विवरण के आधार पर वाहनों और पर्यटकों को अनुमति दी जाएगी।
सरकार ने अदालत के आधार पर परामर्श जारी किया है कि पर्यटक यहां आने से पहले विधिवत ई-पास ले लें। नीलगिरि और दिंडीगुल जिलों में पर्यटन और कारोबारी उद्देश्यों से आने वाले कारोबारियों की आवाजाही पर कोई प्रतिबंध नहीं है, बस उनको ई-पास लेना होगा। ई-पास आवेदन की प्रक्रिया सोमवार सुबह छह बजे से शुरू हो जाएगी। विदेशी यात्री अपने ई-मेल आईडी से तो घरेलू यात्री अपने फ़ोन नंबर का उपयोग कर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने पर उन्हें स्वत: ई-पास मिल जाएगा। यह व्यवस्था इसलिए की जा रही है ताकि पर्यटकों की आवाजाही आसान रहे। सरकार ने विश्वास दिलाया कि पर्यटकों और आम लोगों को इसमें किसी तरह की असुविधा नहीं होगी।