आइआइटी मद्रास (IIT-Madras) के शोधकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ टैक्सास व यूएस आर्मी रिसर्च लैबोरेट्री के साथ मिलकर मैग्नेशियम एलॉय (Magnesium Alloy) विकसित किया है जिसका उपयोग उक्त कलपुर्जों में होगा।
चेन्नई. ऑटोमोटिव व एयरोस्पेस कलपुर्जों में प्रयुक्त स्टील व एलुमिनियम की जगह अब भविष्य में संभवत: मैग्नेशियम मिश्रधातु (एलॉय) का उपयोग होगा। आइआइटी मद्रास के शोधकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ टैक्सास व यूएस आर्मी रिसर्च लैबोरेट्री के साथ मिलकर मैग्नेशियम एलॉय विकसित किया है जिसका उपयोग उक्त कलपुर्जों में होगा। फिलहाल कम क्षमता और उत्पादकता की वजह से मैग्नेशियम एलॉय का उद्योग जगत में बहुत कम उपयोग होता है।
विश्वभर के पर्यावरण प्रदूषण में वाहनों से निकलने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड करीब २७ प्रतिशत है। इसे कम करने के विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं। खासकर इसी वजह से हल्के वजन वाले वाहनों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। ताकि उनकी ऊर्जा दक्षता बढ़े।
आइआइटी के एसोसिएट प्रोफेसर डा. सुशांत कुमार पाणिग्रही, टैक्सास विवि के प्रोफेसर राजीव मिश्रा व यूएस आर्मी लैब से के. चो ने इस प्रोजेक्ट पर काम किया है।
इस टीम ने यह मिश्रधातु तैयार की है जो साम्य स्थापित करेगा और उच्च लोचशील होगा। इनके शोध का प्रपत्र मैटेरियल रिसर्च लेटर्स जर्नल में प्रकाशित हो चुका है। यह एलॉय मजबूत, लोचशील और सुपरप्लास्टिीसिटी वाला है जिससे निर्माण में लगने वाला समग्र समय, परिश्रम और लागत घटेगी। इसके अतिरिक्त यह हल्का होगा और वाहनों से निकलने वाले कार्बन उत्सर्जन को भी कम करेगा। लिहाजा वाहन कम ईंधन पर चलेंगे और किफायती होंगे।