तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में AIADMK गठबंधन की 197 सीटें, DMK को करारी हार, जयललिता बनीं मुख्यमंत्री तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2001 में AIADMK गठबंधन ने जबरदस्त जीत दर्ज की है। जयललिता के नेतृत्व में पार्टी और उसके सहयोगियों ने 234 में से 197 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की, जबकि सत्तारूढ़ DMK गठबंधन को 28 सीटों […]
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2001 में AIADMK गठबंधन ने जबरदस्त जीत दर्ज की है। जयललिता के नेतृत्व में पार्टी और उसके सहयोगियों ने 234 में से 197 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की, जबकि सत्तारूढ़ DMK गठबंधन को 28 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा।
10 मई 2001 को हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में AIADMK और उसके सहयोगियों ने कुल 49.89 प्रतिशत वोट हासिल किए। AIADMK ने अकेले 132 सीटें जीतीं, वहीं उसके सहयोगियों में तमिल मनीला कांग्रेस (TMC) को 22, पट्टाली मक्कल कच्ची (PMK) को 20, कांग्रेस (I) को 7, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) को 5, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPIM) को 6 और अन्य सहयोगियों को 1-1 सीट मिली।
दूसरी ओर, DMK गठबंधन को सिर्फ 38.03 प्रतिशत वोट मिले और उसे 28 सीटें ही मिलीं। भाजपा ने DMK के साथ मिलकर 21 सीटों पर चुनाव लड़ा और 4 सीटें हासिल कीं।
DMK के लिए यह चुनाव बेहद निराशाजनक रहा। पार्टी को 11 जिलों में एक भी सीट नहीं मिली, जिनमें मदुरै, कोयंबत्तूर, इरोड, धर्मपुरी, दिंडीगुल और तूतीकोरिन शामिल हैं। चेन्नई में भी DMK का गढ़ कमजोर पड़ा, जहां 14 में से सिर्फ 10 सीटें मिलीं। AIADMK, TMC और CPIM ने भी चेन्नई में 1-1 सीट पर कब्जा जमाया।
जयललिता इस चुनाव में किसी भी सीट से उम्मीदवार नहीं बन सकीं, क्योंकि तांसी जमीन घोटाले में दोषसिद्धि के चलते उनका नामांकन रद्द कर दिया गया था। इसके बावजूद, पार्टी ने उन्हें विधायक दल का सर्वसम्मति से नेता चुना और मुख्यमंत्री पद के लिए नामित किया। जयललिता की नामांकन अस्वीकृति ने उनके पक्ष में सहानुभूति लहर पैदा की, जिसे उन्होंने चुनाव प्रचार में भी भुनाया।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 21 सितंबर 2001 को अपने फैसले में स्पष्ट किया कि आपराधिक मामले में दो वर्ष या उससे अधिक की सजा पाए व्यक्ति को मुख्यमंत्री नहीं बनाया जा सकता। इस फैसले के बाद जयललिता ने इस्तीफा दे दिया और पार्टी ने ओ. पन्नीरसेल्वम को मुख्यमंत्री नियुक्त किया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, AIADMK गठबंधन की रणनीति और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की समस्याएं उसकी जीत में निर्णायक रहीं। एमडीएमके ने 211 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन कोई सीट नहीं जीत सका। जातिगत पार्टियों को भी जनता ने इस चुनाव में नकार दिया।
TMC, कांग्रेस और PMK नेताओं ने कहा कि जनता ने जयललिता को मुख्यमंत्री बनाने के लिए वोट दिया। CPI और CPIM नेताओं ने आर्थिक उदारीकरण व वैश्वीकरण से जनता की नाराजगी को DMK-भाजपा गठबंधन की हार का मुख्य कारण बताया।
इस चुनाव में DMK के 15 मंत्री भी हार गए, जिससे राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। जयललिता की वापसी और AIADMK गठबंधन की प्रचंड जीत ने तमिलनाडु की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है।