
पूरी तरह अपने ही देश में विकसित आकाश कई दूसरे देशों की सेना के लिए उपयुक्त है
कोय बत्तूर. स्वदेशी मिसाइल आकाश की खरीद के लिए कई देशों ने रुचि दिखाई है। कई देशों से इस बारे में बातचीत भी चल रही है। यह जानकारी यहां रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ)के शीर्ष अधिकारी ने यहां पत्रकारों से बातचीत में दी।डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ एस क्रिस्टोफर ने कहा कि पूरी तरह अपने ही देश में विकसित आकाश कई दूसरे देशों की सेना के लिए उपयुक्त है। यह किसी भी मौसम में सतह से आसमान में मार करने में सक्षम है। इसकी विदेशों में काफी मांग है।हालांकि सुरक्षा कारणों से उन्होंने किसी देश का उल्लेख नहीं किया। क्रिस्टोफर ने कहा कि उन देशों से बातचीत जारी है।
इसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित किया गया है मिसाइल प्रणाली विमान को 30 किमी दूर व 18 ,000 मीटर ऊंचाई तक टारगेट कर सकती है
अनुसंधान और विकास के लिए बजट के आवंटन के बारे में उन्होंने कहा कि इस वर्ष संगठन को 2,000 करोड़ रुपये का बजट मिला है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मोस मिसाइल के बारे में कई देश दिलचस्पी ले रहे हैं।इस मौके पर भारत डायनेमिक लिमिटेड के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक वी उदय भास्कर ने उ मीद जताई कि अगले तीन से चार साल में आकाश की मांग जोर पकड़ेगी। क्योंकि कई देशों की वायुसेना और सेना दोनों ही इसे उपयुक्त मान रही हैं। उल्लखनीय है कि आकाश मध्यम दूर की सतह से हवा में मार करने वाली प्रक्षेपास्त्र प्रणाली है। इसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित किया गया है मिसाइल प्रणाली विमान को 30 किमी दूर व 18 ,000 मीटर ऊंचाई तक टारगेट कर सकती है। इसमें लड़ाकू जेट विमानों, क्रूज मिसाइलों और हवा से सतह वाली मिसाइलों के साथ-साथ बैलिस्टिक मिसाइलों जैसे हवाई लक्ष्यों को बेअसर करने की क्षमता है यह भारतीय थल सेना और भारतीय वायु सेना के साथ परिचालन सेवा में है।