
परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना को तमिलनाडु सरकार ने रद्द कर दिया है, जिससे स्थानीय किसानों और गांव वालों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री विजय की सरकार ने यह स्पष्ट किया कि अब कांचीपुरम जिले के परंदूर में एयरपोर्ट निर्माण नहीं होगा, और नए स्थल की तलाश शुरू कर दी गई है।
चेन्नई के पास कांचीपुरम जिले में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को राज्य सरकार ने वापस ले लिया है। ऊर्जा संसाधन और विधि मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने गुरुवार को बताया कि टीवीके सरकार डीएमके की 5,000 एकड़ भूमि और 20,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना के खिलाफ है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार विकास के पक्ष में है, लेकिन महत्वपूर्ण जलाशयों और तीन बार फसल देने वाली उपजाऊ कृषि भूमि का विनाश नहीं किया जा सकता।
मंत्री निर्मल कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री विजय ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भी इसी परियोजना के विरोध से की थी। स्थानीय लोगों की चिंता थी कि एक हजार से अधिक परिवारों का विस्थापन होगा, कृषि भूमि का अधिग्रहण, आजीविका का नुकसान, जलाशयों का बंद या मोड़ना, आर्द्रभूमियों का विनाश और पर्यावरणीय प्रभाव पड़ेगा। इसी वजह से सरकार ने परंदूर में एयरपोर्ट नहीं बनाने का फैसला लिया और नए स्थान की पहचान शुरू की है।
राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जून माह तक श्रीपेरुंबदूर और कांचीपुरम तालुक के 12 गांवों से 1,700 एकड़ निजी भूमि अधिग्रहित की जा चुकी थी। इसमें एकनापुरम गांव शामिल नहीं है, जहां के निवासी एक हजार से अधिक दिन से परियोजना का विरोध कर रहे हैं। एयरपोर्ट के लिए कुल 5,746 एकड़ भूमि निर्धारित की गई थी, जिसमें से 2,500 एकड़ निजी भूमि है जबकि शेष सरकारी विभागों की भूमि है। अधिकारी ने बताया कि 90 प्रतिशत से अधिक भूमिधारकों को मुआवजा दिया जा चुका है, शेष का भुगतान प्रक्रिया में है।
परंदूर एयरपोर्ट परियोजना का स्थानीय लोगों द्वारा लगातार विरोध हुआ। पूर्व डीएमके सरकार ने भूमि अधिग्रहण तेज करने के लिए परियोजना को राज्य विशेष परियोजना अधिनियम, 2023 के तहत 'विशेष परियोजना' का दर्जा दिया था। जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री विजय ने परंदूर का दौरा कर एकनापुरम और आसपास के गांवों के विरोध कर रहे प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी।
एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने वर्ष 2022 में परंदूर और पन्नूर को चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट के लिए संभावित स्थल के रूप में शॉर्टलिस्ट किया था। अब सरकार नए विकल्पों की तलाश में है। हालांकि, परियोजना का समर्थन करने वालों का कहना है कि महानगर के आसपास इतनी बड़ी भूमि का मिलना आसान नहीं है, और एयरपोर्ट अथारिटी से इजाजत मिलना भी चुनौतीपूर्ण है। फिलहाल, चेन्नई के पास दूसरे एयरपोर्ट का निर्माण फिर अनिश्चितकाल के लिए टल गया है।