
चेन्नई. भ्रष्टाचार मामले में सजायाफ्ता व एआईएडीएमके से बर्खास्त वी. के. शशिकला की ओर से ईके पलनीस्वामी (ईपीएस) और ओ. पन्नीरसेल्वम (ओपीएस) की अगुवाई वाली एआईएडीएमके को दो हरी पत्ती वाला चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाने की समीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को याचिका दाखिल की गई।
पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी महासचिव रहीं जे. जयललिता के निधन के बाद शशिकला और ईपीएस-ओपीएस समूह की ओर से पार्टी के चुनाव चिन्ह पर दावा किया गया। चुनाव आयोग ने इस वजह से आर. के. नगर विधानसभा उपचुनाव के वक्त इस चुनाव चिन्ह को सीज कर दिया था।
चुनाव के उपरांत दोनों पक्षों ने निर्वाचन आयोग में अपने दावे को लेकर दलीलें व दस्तावेज पेश किए। आयोग ने ईपीएस-ओपीएस समूह के पक्ष में अपना फैसला सुनाया।
इस निर्णय पर शशिकला व दिनकरण की ओर से दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील की गई। न्यायालय ने अपील को ठुकराते हुए आयोग के फैसले को सही ठहराया। शशिकला व दिनकरण ने फिर सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई लेकिन वहां से भी उनको निराशा हाथ लगी।
लोकसभा चुनाव के ठीक पहले आला अदालत ने दिनकरण समूह को राजनीतिक दल का दर्जा देने से भी इनकार करते हुए उनके प्रत्याशियों को निर्दलीय मानते हुए समान चुनाव चिन्ह देने का निर्वाचन आयोग को सुझाव दिया।
लोस और विस उपचुनाव के बाद अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम (एएमएमके) ने तय किया कि वह चुनाव आयोग से पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करेगी। इसी वजह से उपमहासचिव दिनकरण को महासचिव बनाया गया। दिनकरण ने स्पष्ट कर दिया था कि वी. के. शशिकला दो हरी पत्ती चुनाव चिन्ह को हासिल करने की अपनी कवायद जारी रखेंगी।
इस पृष्ठभूमि में शशिकला के वकील राजा सेंथूरपांडियन ने शीर्ष न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की। शशिकला ने पार्टी, इसके चुनाव चिन्ह और पताका पर फिर से दावा ठोका है। इस याचिका पर जल्द ही सुनवाई होगी।