मिलनाडु विधानसभा के नए सत्र की शुरुआत में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के अभिभाषण को लेकर विपक्षी दलों ने अपनी प्रतिक्रिया दी। डीएमडीके महासचिव प्रेमलता विजयकांत ने कहा राज्यपाल का भाषण सत्तारूढ़ टीवीके सरकार के पक्ष में झुका हुआ था और इसमें राज्य के गंभीर कानून-व्यवस्था के मुद्दों की अनदेखी की गई।

तमिलनाडु विधानसभा (Tamil Nadu Assembly) के नए सत्र की शुरुआत में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के अभिभाषण पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। डीएमडीके महासचिव प्रेमलता विजयकांत ने कानून-व्यवस्था पर चुप्पी को लेकर चिंता जताई, जबकि पीएमके ने जातिगत जनगणना की घोषणा का स्वागत किया है।
तमिलनाडु विधानसभा के सत्र के दौरान राज्यपाल के भाषण को लेकर डीएमडीके और पीएमके ने अपनी-अपनी चिंताएं और प्रतिक्रियाएं सामने रखीं। डीएमडीके महासचिव प्रेमलता विजयकांत ने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण पूरी तरह सत्तारूढ़ टीवीके सरकार के पक्ष में तैयार किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के गंभीर कानून-व्यवस्था के मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है।
प्रेमलता ने यह भी कहा कि पुरानी सरकारों की योजनाओं को इस तरह प्रस्तुत किया गया, जिससे वर्तमान सत्तारूढ़ दल को राजनीतिक लाभ मिले। हालांकि, उन्होंने तमिल ताई वज्थु के गायन और दो बार राष्ट्रगान बजाए जाने की परंपरा का स्वागत किया और इसे उचित बताया। डीएमडीके ने शुक्रवार को अभिभाषण के अन्य पहलुओं तथा केंद्र सरकार से जुड़ी बातों पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया देने की घोषणा की है।
पीएमके विधायक सौम्या अन्बुमणि ने सरकार द्वारा जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि इसकी मांग आठ दशकों से की जा रही थी। उन्होंने कहा कि यह सर्वेक्षण सरकार को परिवारों की वास्तविक आवश्यकताओं की जानकारी देगा और कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में मदद करेगा।
सौम्या अन्बुमणि ने महिला अपराधों पर नियंत्रण के लिए अलग डीजीपी के अंतर्गत विशेष इकाई बनाने की मांग की। साथ ही, उन्होंने शराब और नशीली दवाओं के दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई, महिला अपराधों की त्वरित जांच, सुनवाई और सजा की जरूरत पर बल दिया। सौम्या ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों को ऐसा कड़ा दंड मिलना चाहिए, जिससे उनमें कानून का वास्तविक भय पैदा हो।
राज्यपाल के अभिभाषण के बाद तमिलनाडु की राजनीति में कानून व्यवस्था और सामाजिक-आर्थिक सुधारों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। विपक्षी दलों की मांगों और सुझावों के साथ यह सत्र आगे भी चर्चाओं में रहने की संभावना है।