
Tamil Nadu MPs letter to Governor: तमिलनाडु में सरकारी व विश्वविद्यालयी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान और राज्यगीत के बजाए जाने के क्रम को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के 21 सांसदों ने गुरुवार को तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को पत्र भेजकर 'तमिल थाई वाझथु' (Tamizh Thai Vaazhthu) को कार्यक्रमों की शुरुआत में बजाने की पुरानी परंपरा को बहाल करने का अनुरोध किया है।
बता दें कि 5 अगस्त को लिखे गए इस पत्र में 21 सांसदों ने राज्यपाल से अनुरोध किया कि राजभवन सभी विश्वविद्यालयों, सरकारी संस्थानों और सरकारी कार्यक्रम आयोजित करने वाली एजेंसियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे। सांसदों ने कहा कि हर सरकारी कार्यक्रम की शुरुआत तमिलनाडु के राज्यगीत 'तमिल थाई वाझथु' से की जानी चाहिए, जबकि कार्यक्रम का समापन हमेशा की तरह राष्ट्रीय गान 'जन गण मन' के साथ होना चाहिए। उनका कहना है कि यह परंपरा राज्य की सांस्कृतिक पहचान और सम्मान से जुड़ी हुई है, इसलिए इसे पहले की तरह सभी सरकारी आयोजनों में अनिवार्य रूप से लागू किया जाना चाहिए।
यह मामला 28 जुलाई को तिरुनेलवेली के मनोन्मनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय के 33वें दीक्षांत समारोह के बाद गरमाया। आरोप है कि राजभवन के निर्देशों के चलते कार्यक्रम की शुरुआत 'वंदे मातरम' से हुई, जिसके बाद राष्ट्रगान गाया गया और राज्यगीत 'तमिल थाई वाझथु' को तीसरे स्थान पर रखा गया। इन सभी सांसदों का कहना है कि राज्यगीत को तीसरे स्थान पर रखना तमिलनाडु की जनता और विश्वविद्यालय के नामस्रोत मनोन्मनियम सुंदरनार पिल्लई का अपमान महसूस होता है।
पत्र लिखने वाले सभी 21 सांसदों ने ध्यान दिलाया कि 2021 में 'तमिल थाई वाझथु' को आधिकारिक राज्यगीत घोषित किया गया था और यह पिछले पांच दशकों से सार्वजनिक कार्यक्रमों का हिस्सा रहा है। इतना ही नहीं कर्नाटक जैसे अन्य राज्यों की परंपराओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राज्यगीत को हमेशा प्राथमिकता दी जाती है।
इस पत्र पर पी. चिदंबरम, के कार्ति चिदंबरम, बी. मणिकम टैगोर, थोल थिरुमावलवन और दुरई वैको सहित 21 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। राजभवन की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।