
बुंदेलखंड के छतरपुर जिले के मड़देवरा क्षेत्र के लिए एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण औद्योगिक उपलब्धि सामने आई है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया यानी जीएसआइ से हरी झंडी मिलने के बाद खनिज संसाधन विभाग ने मड़देवरा में रॉक फॉस्फेट की सबसे बड़ी खदान का ऑक्शन यानी नीलामी सफलतापूर्वक संपन्न कर ली है। सैटेलाइट मैपिंग के जरिए चिन्हित किए गए इस पूरे प्रस्तावित क्षेत्र में रॉक फॉस्फेट का एक विशाल भंडार छिपा हुआ है, जिसकी पुष्टि के बाद अब यहां माइनिंग ऑपरेशंस को शुरू करने की तैयारियां तेज हो गई हैं। भोपाल स्तर से पूरी हुई नीलामी प्रक्रिया में यह खदान शोभा मिनरल्स जबलपुर के नाम स्वीकृत हुई है।
माइनिंग विभाग के स्थानांतरित डिप्टी डायरेक्टर अमित मिश्रा के अनुसार मड़देवरा ब्लॉक के इस सर्वेक्षण में 57 लाख मीट्रिक टन से अधिक रॉक फॉस्फेट का अकूत भंडार पाए जाने का अनुमान जताया गया है। इतनी बड़ी मात्रा में उपलब्धता की पुष्टि होने के बाद, प्लांट संचालन और माइनिंग गतिविधियों के लिए कुल 107.590 हेक्टेयर का विशाल क्षेत्र प्रस्तावित और रिजर्व किया गया है। खनिज विभाग के तकनीकी जानकारों का कहना है कि मड़देवरा के इस निर्धारित क्षेत्र में रॉक फॉस्फेट की सघनता और गुणवत्ता बेहद उच्च स्तर की है, जिसे देखते हुए ऑक्शन में चयनित कंपनी इसी चिन्हित स्थल पर गहराई से उत्खनन का कार्य करेगी। कंपनी को विभाग की तरफ से आशय पत्र यानी एलओआई जारी किया जा चुका है और पर्यावरण क्लीयरेंस यानी इसी मिलते ही खदान में जमीनी वर्किंग शुरू कर दी जाएगी।
इस महाप्रोजेक्ट के जमीनी विस्तार के लिए जमीन की उपलब्धता का पूरा खाका भी तैयार कर लिया गया है। प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए कुल 86.170 हेक्टेयर राजस्व भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इसके अलावा, निर्धारित क्षेत्र के भीतर आने वाली 15.848 हेक्टेयर निजी जमीन को भी अधिग्रहित किया जाना प्रस्तावित है, जबकि इस पूरे प्रोजेक्ट की जद में आने से 5.572 हेक्टेयर फॉरेस्ट यानी वन भूमि भी आंशिक रूप से प्रभावित होगी।
ज्यूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआइ) ने छतरपुर जिले के मड़देवरा में 57 लाख मीट्रिक टन रॉक फास्फेट के भडार को चिंहित किया है। जिसके आधार पर जिला खनिज विभाग ने शासन को 122 हेक्टेयर में रॉक फॉस्फेट की दो खदानों की नीलामी का प्रस्ताव अक्टूबर 2020 में बनाया था। खनिज विभाग और जीएसआइ ने साथ मिलकर एक रिपोर्ट तैयार की है। जिसमें जीएसआइ ने मड़देवरा ब्लॉक में 57 लाख मीट्रिक टन रॉक फास्फेट के भंडार का आंकलन लगाया है। 122 हेक्टेयर में 67 हेक्टेयर जमीन रॉक फास्फेट के खनन और 37 हेक्टेयर जमीन नॉन मिनरलाइज्ड होगी। 67 हेक्टेयर क्षेत्र में से 15 से 20 हेक्टेयर में रॉक फॉस्फेट की मात्रा अधिक है, वहीं 2 किलोमीटर लंबे और 2 किलोमीटर चौड़े हिस्से में लगभग 15 से 20 लाख मीट्रिक टन रॉक फॉस्फेट की उपलब्धता का आंकलन किया गया है।
जिले के मड़देवरा इलाके में उलब्ध रॉक फास्टफेट का भंडार उर्वरक निर्माण के लिए उपयुक्त है। हालांकि खदान में ज्यादातर मात्रा 18 से 20 पी2ओ 5 ग्रेड का है, जो लो क्वालिटी के अंतर्गत आता है। जबकि 24 प्लस पी 2ओ5 ग्रेड की मात्रा उवर्रक संयंत्र के लिए सप्लाई होता है। वहीं, क्षेत्र में 42 से 34 पी2ओ5 ग्रेड का रॉक फास्फेट का भी भंडार है। जैविक खाद बनाने के लिए गोबर तथा रॉक फॉस्फेट को प्रयोग में लाया जाता है। रॉक फॉस्फेट की मदद से रासायनिक क्रिया करके सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी)तथा डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) रासायनिक उर्वरक तैयार किए जाते हैं। खनिज फास्फेटों का सर्वाधिक प्रयोग फास्फेट उर्वरकों के निर्माण में होता है। रॉक फॉस्फेट की खदान से निकाले गए फास्फेटीय चट्टान को चूर्ण करके सल्फयूरिक अमल के साथ मिलाकर सुपरफास्फेट बनता है। इस पदार्थ का प्रयोग उर्वरक के रूप में अत्यधिक होता है। साधारण फास्फेटीय चट्टान के चूर्ण में 30 से 40 प्रतिशत फास्फोरस पेंटॉक्साइड, 3-4 प्रतिशत फ्लोरीन तथा भिन्न मात्राओं में चूना रहता है।
जिले में अब तक हो रहे ग्रेनाइट, हीरा, रेत और क्रशर गिट्टी के पारंपरिक उत्खनन के बाद रॉक फॉस्फेट की यह अपने आप में पहली और अनोखी खदान स्थापित होने जा रही है। इस नए उद्योग के आने से मड़देवरा और छतरपुर के स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने के बड़े आसार बन गए हैं। माइनिंग शुरू होने और खाद बनाने वाले उद्योगों तथा उनके सहायक कल-कारखानों की स्थापना होने से न केवल लॉजिस्टिक्स बल्कि क्षेत्र की पूरी आर्थिक तस्वीर बदलने की उम्मीद जताई जा रही है।