छतरपुर

घर चलाने की मजबूरी में छूट रही पढ़ाई, बालिकाओं की तुलना में बालक अधिक छोड़ रहे स्कूल

हाईस्कूल स्तर पर राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक ड्रॉपआउट, मजदूरी की भेंट चढ़ रही छतरपुर जिले के बच्चों की माध्यमिक शिक्षा
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Aug 07, 2026
education drop
एआई फोटो

जिले के सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं की उपिस्थति चिंताजनक होती जा रही है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) 2025-26 के अनुसार छतरपुर में माध्यमिक और हाईस्कूल स्तर पर ड्रॉपआउट दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। सबसे अधिक चिंता हाईस्कूल स्तर की है, जहां 16.8 प्रतिशत विद्यार्थी पढ़ाई बीच में छोड़ रहे हैं। यह राष्ट्रीय औसत 11.5 प्रतिशत से काफी अधिक है।लड़कों में अधिक ड्रॉपआउटआंकड़ों के अनुसार जिले में लड़कियों की तुलना में लड़के अधिक संख्या में पढ़ाई छोड़ रहे हैं। माध्यमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) पर लड़कों की ड्रॉपआउट दर 6.7 प्रतिशत और लड़कियों की 5.9 प्रतिशत है, जबकि जिले का औसत 6.3 प्रतिशत है। हाईस्कूल (कक्षा 9-10) में लड़कों की ड्रॉपआउट दर 18.9 प्रतिशत और लड़कियों की 12.6 प्रतिशत दर्ज की गई है।शिक्षा विभाग के अनुसार नौवीं कक्षा में पहुंचते ही कई लड़कों पर परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। खेती के मौसम में स्कूल से अनुपस्थिति बढ़ती है और बाद में अधिकांश छात्र पढ़ाई में वापस नहीं लौट पाते। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का दबाव और शहरी क्षेत्रों में पढ़ाई का बढ़ता प्रतिस्पर्धी माहौल भी ड्रॉपआउट की बड़ी वजह है।

गांव और शहर में यह कारण आए सामने

ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों में 32 प्रतिशत परिवार के काम, खेती और पशुपालन में लग जाते हैं। 28 प्रतिशत बच्चे पढ़ाई में पिछड़ने के कारण स्कूल छोड़ देते हैं। 16 प्रतिशत आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई जारी नहीं रख पाते, जबकि 12 प्रतिशत रोजगार की तलाश में मजदूरी या अन्य कार्य करने लगते हैं।

शहरी क्षेत्रों में 35 प्रतिशत विद्यार्थियों ने पढ़ाई में तालमेल नहीं बैठा पाने को कारण बताया। 22 प्रतिशत रोजगार की तलाश में पढ़ाई छोड़ देते हैं। 21 प्रतिशत परिवारों के लिए पढ़ाई का खर्च वहन करना कठिन हो जाता है, जबकि 18 प्रतिशत विद्यार्थी परिवार के काम में हाथ बंटाने के कारण स्कूल छोड़ देते हैं।

हाईस्कूल स्तर पर स्थिति चिंताजनक

माध्यमिक स्तर पर राष्ट्रीय औसत 3.5 प्रतिशत के मुकाबले जिले की ड्रॉपआउट दर 6.3 प्रतिशत है। वहीं हाईस्कूल स्तर पर यह आंकड़ा 16.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। इससे स्पष्ट है कि सबसे अधिक विद्यार्थी 9वीं और 10वीं के दौरान शिक्षा व्यवस्था से बाहर हो रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल नि:शुल्क शिक्षा पर्याप्त नहीं है। आर्थिक सहायता, व्यावसायिक शिक्षा, नियमित काउंसिलिंग और ड्रॉपआउट विद्यार्थियों की लगातार निगरानी से ही इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। उनका मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो जिले में कुशल युवाओं की कमी और बाल श्रम जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

फैक्ट फाइल

माध्यमिक स्तर (कक्षा 6 से 8)

जिला औसत : 6.3 प्रतिशत

लड़के : 6.7 प्रतिशत

लड़कियां : 5.9 प्रतिशत

राष्ट्रीय औसत : 3.5 प्रतिशत

हाईस्कूल स्तर (कक्षा 9 से 10)

जिला औसत : 16.8 प्रतिशत

लड़के : 18.9 प्रतिशत

लड़कियां : 12.6 प्रतिशत

राष्ट्रीय औसत : 11.5 प्रतिशत

पढ़ाई छोड़ने के प्रमुख कारण

कारण ग्रामीण (%) शहरी (%)

परिवार के काम में हाथ बंटाना 32 18

पढ़ाई में तालमेल नहीं बैठना 28 35

रोजगार की तलाश 12 22

आर्थिक तंगी 16 21

यह बोले जिला शिक्षा अधिकारी

जिला शिक्षा अधिकारी प्रकाश रैकवार ने बताया कि जिले में ड्रॉपआउट कम करने के लिए स्कूल स्तर पर अभिभावकों की काउंसिलिंग कराई जाएगी। बच्चों और उनके माता-पिता को नियमित रूप से परामर्श दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लड़कों में ड्रॉपआउट के प्रमुख कारण आर्थिक मजबूरी, पलायन और पारिवारिक जिम्मेदारियां हैं। इन कारणों को कम करने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

Updated on:
07 Aug 2026 11:24 am
Published on:
07 Aug 2026 11:24 am
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