
Chhatarpur news: पान मसाला बनाने के लाइसेंस की आड़ में जर्दायुक्त गुटखा तैयार करने का कारोबार जिले में पैर पसार रहा है। नौगांव में डिस्टलरी रोड समेत चार स्थानों पर नई फैक्ट्रियां खुलने की जानकारी सामने आई है। वहीं ईशानगर तक यह कारोबार के फैल गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि पान मसाला निर्माण के लिए जारी 250 से अधिक लाइसेंसों का भौतिक सत्यापन नहीं होने के कारण गुटखा माफिया का पूरे जिलेभर में नेटवर्क फैलने लगा है। पान मसाला निर्माण की अनुमति का इस्तेमाल कर जर्दायुक्त गुटखा तैयार कर सप्लाई की जा रही है।
गुटखा के निर्माण में खतरनाक रसायनों के इस्तेमाल से आमलोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। दो माह पहले छतरपुर शहर में एक अवैध फैक्ट्री पर कार्रवाई के बाद माफिया ने नौगांव चार नए ठिकाने बना लिए हैं। जानकारी मुताबिक हरपालपुर और ईशानगर में भी नई गुटखा फैक्ट्रियां शुरू की गई हैं। दावा है कि मशीनें, कच्चा माल और इनामी कूपन जैसे प्रचार माध्यमों का लालच देकर दूसरे लोगों के जरिए उत्पादन कराया जा रहा है। हालांकि, इस नेटवर्क की भूमिका और संचालकों की पहचान होने के बाद भी खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी मूकदर्शक बने हुए है।
नौगांव क्षेत्र में तिंदनी, ददरी, बिलहरी-चौबारा, हल्लू कॉलोनी, ईशानगर रोड, डिस्टलरी रोड, परम कॉलोनी, गल्ला मंडी, आर्मी कॉलेज के पास और बिलहरी-नौगांव फोरलेन के पास अवैध गुटखा निर्माण या कारोबार धडल्ले से चल रहा है। इतना ही नहीं शिकारपुरा, सुनाटी और गरोली में भी गुटखा बनने की अवैध फैक्ट्री संचालित हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी केवल लाइसेंस जारी करने तक सीमित नहीं है। निर्माण इकाई में क्या बन रहा है, कच्चे माल का इस्तेमाल किस तरह हो रहा है और तैयार उत्पाद निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं या नहीं, इसकी जांच भी जरूरी है। ऐसे में 250 से अधिक लाइसेंस के दायरे में आने वाली इकाइयों का भौतिक सत्यापन, उत्पादन की जांच और नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट महत्वपूर्ण है। यदि किसी इकाई को पान मसाला निर्माण की अनुमति मिली है और वहां प्रतिबंधित या गैरकानूनी उत्पाद तैयार हो रहा है, तो यह नियमों के उल्लंघन का मामला है। विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि कितनी इकाइयों का निरीक्षण किया गया, कितने नमूने लिए गए और कितनी जगह अनियमितताएं मिलीं। जिलेभर में संचालित दर्जनों गुटखा मशीनों का सरगना फूडसेफ्टी विभाग में सांठ-गांठ किए हैं, इस कारण माफिया बेखौफ काम कर रहा है।
गुटखा पर 48 फीसदी जीएसटी होने के कारण बगैर अनुमति के उत्पादन और बिक्री से कर चोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका है। एमपी से यूपी तक सप्लाई होने के कारण उत्पादन, परिवहन, बिलिंग और कर रिकॉर्ड का मिलान अहम होगा। तंबाकू और जर्दायुक्त गुटखे का सेवन मुंह के कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ा गया है।
मेरे पास सिर्फ छतरपुर का अतिरिक्त प्रभार होने से एफएसओ के कार्यों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग करना संभव नहीं है। एफएसओ को गुटखा फैक्ट्रियों की जांच के निर्देश दिए जाएंगे। -अरविंद पथरौल, प्रभारी जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी, छतरपुर