छतरपुर

लखनऊ- भोपाल में सुलझेगा केन नदी पर रेत खदान की सीमा का विवाद

छतरपुर की हर्रई और बांदा जिले की बिलहरका रेत खदान की सीमा का है विवादछतरपुर जिले के प्रशासन व बांदा के प्रशासन के बीच नहीं बनी सहमति, अब सरकार के स्तर पर होगा निर्णय
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Mar 18, 2020
There is a dispute over the the sand mine
There is a dispute over the the sand mine

छतरपुर। जिले की चंदला तहसील इलाके में केन नदी की हर्रई रेत खदान और यूपी के नरैनी तहसील की बिलहरका रेत खदान की सीमा का विवाद अब लखनऊ और भोपाल स्तर पर ही सुलझेगा। दोनों जिलों के प्रशासन के स्तर पर मामला सुलझ नहीं पाया है। छतरपुर जिला प्रशासन नदी के मध्य से आधा-आधा हिस्सा की बात कह रहा है, जबकि यूपी का प्रशासन जलधारा से आधा-आधा हिस्सा होने का दावा कर रहा है। जिसके चलते रेत खदान की सीमा का विवाद सुलझ नहीं पा रहा है। सोमवार को चंदला तहसीलदार पीयूष दीक्षित, खनिज अधिकारी अमित मिश्रा खदान पर सीमांकन करने पहुंचे। लेकिन यूपी के अधिकारियों के विरोध के चलते सीमांकन नहीं हो सका। प्रशासन की टीम इस सीमा विवाद को सुलझाए बिना लौट आई। अब दोनों राज्य के जिला प्रशासन की टीम अपनी-अपनी रिपोर्ट अपने वरिष्ठ अधिकारियों को देंगे। जिसके बाद भोपाल और लखनऊ स्तर पर इस मामले का निपटारा होगा।
एमपी जमीन से यूपी पानी से करना चाहता है बंटवारा
केन नदी पर छतरपुर जिले की ओर बंंिसया थाना की हर्रई रेत खदान है। वहीं, दूसरी ओर बांदा जिले की नरैनी तहसील की बिलहरका खदान है। यूपी के ठेकदार व रेत माफिया छतरपुर जिले की सीमा में घुसकर हर्रई रेत खदान से अवैध रूप से उत्खनन करते हैं। जिसकों लेकर कई बार विवाद हुआ। स्थानीय ग्रामीणों ने भी कई बार अधिकारियों से इसकी शिकायत की। समस्या के समाधान के लिए सोमवार को चंदला तहसीलदार पीयूष दीक्षित, जिला खनिज अधिकारी अमित मिश्रा, खनिज इंस्पेक्टर अजय मिश्रा, बंसिया थाना प्रभारी संदीप खरे और आरआई पटवारी को लेकर हर्रई खदान का सीमांकन करने पहुंचे। इसी समय यूपी के नरैनी की एसडीएम वंदिता श्रीवास्तव, खनिज अधिकारी शैलेन्द्र महोदया समेत खनिज एवं राजस्व अमला भी मौके पर पहुंचा। सीमांकन को लेकर दोनों राज्यों के प्रशासन की सहमति नहीं बन पाई। छतरपुर प्रशासन नदी के बीच से आधा-आधा हिस्सा होने का दावा कर रहा है। जबकि यूपी प्रशासन जलधारा से आधा-आधा हिस्सा होने की बात कह रहा है। छतरपुर प्रशासन का कहना है कि जल धारा परिवर्तित होती रहती है। इसके साथ ही जमीन का सीमांकन जमीन व नक्शे के आधार पर होता है, न कि पानी की धारा के आधार पर। सीमांकन की सहमति नहीं बनने से दोनों प्रदेशों के अधिकारियों ने प्रतिवेदन बनाकर अपने अपने आला अधिकारियों को भेजने की बात कही और बिना सीमांकन किए लौट गए।
240 मीटर का है विवाद
केन नदी की हर्रई और यूपी के बिलहरका के बीच 240 मीटर भूमि पर दोनों प्रदेश के अधिकारी अपना-अपना हक जता रहे हैं। चंदला तहसीलदार पीयूष दीक्षित ने बताया कि नदी पर 240 मीटर क्षेत्रफल का विवाद है। जिस एरिया में हमारे नक्शे में हमारा अधिकार है। यूपी के नक्शे में वह अपना अधिकार दर्शा रहे हैं। इसके चलते सीमांकन नहीं हो सका। हमने आला अधिकारियों को प्रतिवेदन बनाकर भेज दिया है। अब इस सीमा विवाद को आला अधिकारी ही सुलझाएंगे। जिला खनिज अधिकारी अमित मिश्रा ने बताया कि केवल विवाद 240 मीटर जमीन का है, प्रतिवेदन राजस्व के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा जा रहा है। आगे से रेत उत्खनन को लेकर विवाद निर्मित न हो इसके लिए प्रयास करेंगे।
कंदैला के नाम पर रामपुर में अवैध उत्खनन
हाईकोर्ट के निर्देश पर अशोक सोनी को कंदैला में 13500 घन मीटर रेत उत्खनन की अनुमति मिली है। हाईकोर्ट ने नए ठेकेदार द्वारा काम शुरु करने या 31 मार्च तक के लिए अनुमति दी है। कोर्ट की अनुमति के आधार पर खनिज विभाग ने भी ईटीपी जारी कर दिया है। खनिज से मिले इटीपी का इस्तेमाल कंदैला रेत खदान से उत्खनन के बजाए रामपुर घाट से अवैध उत्खनन के लिए किया जा रहा है। रामपुर में 2 हैवी मशीनें रेत खदान पर उतारी गई हैं। रेत खदान पर रोजाना ट्रकों का जमावड़ा लग रहा है। जो रेत से भरकर रामपुर पुल से यूपी सप्लाई की जा रही हैं।

वरिष्ठ अधिकारी करेंगे निर्णय
हरई और बिलहरका रेत खदान की जमीन का सीमांकन होना है। उत्तरप्रदेश प्रशासन जलधारा के मध्य से आधा-आधा हिस्सा होने की बात कह रहा है। जबकि चंदला तहसील के नक्शे के अनुसार नदी के बीच से आधा-आधा हिस्सा होना चाहिए। सहमति नहीं बनने से सीमांकन नहीं किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों को प्रतिवेदन भेजा जा रहा है, उन्ही के स्तर पर ही निर्णय लिया जाएगा।
अमित मिश्रा, खनिज अधिकारी

Published on:
18 Mar 2020 06:00 am