छतरपुर

5 महीने में 69 की मौत, वजह खौफनाक…

MP news: मध्य प्रदेश के गांवों में 5 महीने में हो गई 69 की मौत, वजह जानकर हर कोई हो रहा हैरान, जानकर डॉक्टर्स के भी उड़ जाते हैं होश...
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Jan 05, 2026
MP News Superstition horrific Death cases
MP News Superstition horrific Death cases(photo:patrika creation)

MP News: ग्रामीण अंचल में अंधविश्वास अभी भी अपनी जड़े लोगों की मानसिकता पर जमाए हुए है आधुनिकता के इस दौर में भी लोग रूढि़वादी सोच से ग्रस्त हैं। छतरपुर जिले के लोग आज भी अंधविश्वास की चादर ओढ़े हुए हैं। वर्ष 2025 में झाडफ़ूंक और प्रेतबाधा के वहम में करीब 150 लोगों ने अपनी जान गंवा दी है।

हालत बिगड़ती गई और होती गई मौतें

सर्पदंश और अन्य बीमारियों के चलते परिजनों ने अस्पताल न पहुंचकर बाबा और ओझाओं के भरोसे छोड़ दिया। जिसके परिणामस्वरूप मरीज की हालत बिगड़ गई और सही समय पर इलाज न मिलने से मौत हो गई। जुलाई से दिसंबर के बीच ही 69 लोगों की मौत हुई है। जिले में जो भी मौतें अस्पताल में दर्ज हैं उनमें मरीज को सही समय पर इलाज न मिलने से मौत होना सामने आया है।

सर्पदंश और प्रेत बाधाओं के नाम पर अंधविश्वास ले रहा जान

जिले में लोगों ने सर्पदंश और प्रेत बाधाओं के नाम पर फैले अंधविश्वास के चलते मौतें हुई हैं। जिले में ऐसे कई स्थान हैं जहां सर्पदंश के लिए झाडफ़ूंक करते हैं और जब मरीज स्वस्थ्य नहीं होता तब परिजन जिला अस्पताल लाते हैं। तब तक देर हो चुकी होती है।

10 दिन से खुद के शरीर को चाकू से गोदती रही, फिर एक दिन

हरपालपुर की एक महिला ने खुद के गले को काट लिया था और गंभीर रूप से जख्मी हो गई थी। महिला के परिवार वालों का कहना था कि वह करीब 10 दिनों से ऐसी हरकत कर रही है। परिवार के लोग उसे अस्पताल न ले जाकर किसी ओझा के यहां ले गए। जहां उसे मानसिक रोगी बताया गया।

ये मामले करते हैं हैरान

सर्पदंश से मौत(photo:freepik)
सर्पदंश के बाद कराई झाड़फूंक मौत (photo:freepik)
Superstition ने ले ली सर्पदंश से पीड़िता की जान (photo:freepik)
MP News: अंधविश्वास के चलते बिगड़ती जा रही थी तबीयत, आखिरकार अस्पताल जाकर ही बची जान। (photo: freepik)

हर महीने आते हैं 10 केस

एमपी केछतरपुर जिला अस्पताल में हर माह करीब 10 ऐसे केस आ रहे हैं जिनमें सर्पदंश से पीडि़त लोगों को झाडफ़ूंक के बाद उपचार करने के लिए जिला अस्पताल लाया जा रहा है। कई मामले में तो मरीज की जान भी चली गई है। जुलाई और अक्टूबर के बीच में करीब 400 से अधिक सर्पदंश की घटनाएं हुईं। उसके बाद नवंबर और दिसंबर में करीब बीस से अधिक मामले सर्पदंश के आए जिसमें 6 मौतें भी हुईं। जिले में महिलाओं के मानसिक रोगों को प्रेतबाधा समझकर झाडफ़ूंक भी कराई जा रही है।

Superstition Trend in Villagers in MP (photo:freepik)

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