
क्रिटिकल केयर ब्लॉक
जिला अस्पताल के इतिहास में एक नया अध्याय जुडऩे जा रहा है। अब मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए ग्वालियर, भोपाल या दिल्ली के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। केंद्र सरकार की योजना के तहत करीब 32.50 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से तैयार 200 बेड का अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक पूरी तरह बनकर तैयार हो गया है। यह पांच मंजिला भवन न केवल छतरपुर बल्कि आसपास के जिलों के लिए भी जीवनदायिनी साबित होगा।
यह भव्य पांच मंजिला अस्पताल करीब 18 हजार वर्ग फीट के विशाल क्षेत्र में निर्मित किया गया है। पूरी तरह से सेंट्रलाइज्ड एसी युक्त इस भवन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां आने वाले मरीजों को किसी निजी कॉर्पोरेट अस्पताल जैसी सुविधाएं मिल सकें। जिला प्रशासन ने आगामी 30 सितंबर को मुख्यमंत्री द्वारा इस ब्लॉक के संभावित उद्घाटन की तैयारियां युद्ध स्तर पर तेज कर दी हैं। इस ब्लॉक के शुरू होते ही जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की सूरत पूरी तरह बदल जाएगी।
इस नए क्रिटिकल केयर ब्लॉक की सबसे बड़ी ताकत यहां की अत्याधुनिक तकनीक है। भवन में कुल 200 बेड स्थापित किए गए हैं और प्रत्येक पलंग तक सेंट्रल ऑक्सीजन गैस पाइपलाइन पहुंचाई गई है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि आपातकालीन स्थिति में ऑक्सीजन सिलेंडरों की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। भवन में कुल 5 अत्याधुनिक मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (ओटी) और 2 माइनर ओटी बनाए गए हैं। खास रणनीतिक डिजाइन के तहत ग्राउंड फ्लोर पर ही एक माइनर और एक मॉड्यूलर ओटी रखा गया है। इसका उद्देश्य यह है कि यदि कोई मरीज सडक़ दुर्घटना, हार्ट अटैक या अन्य गंभीर स्थिति में आता है, तो उसे ऊपरी मंजिल पर ले जाने में वक्त गंवाए बिना तत्काल सर्जरी की सुविधा मिल सके।
भवन के भीतर सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। इसमें महत्वपूर्ण सेवाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी।
इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू)- गंभीर मरीजों के लिए उन्नत लाइफ सपोर्ट सिस्टम।
कार्डियो यूनिट- हृदय रोगियों के लिए त्वरित उपचार और मॉनिटरिंग।
डायलिसिस केंद्र- गुर्दा रोगियों के लिए आधुनिक मशीनों के साथ डायलिसिस की सुविधा।
महिला एवं शिशु स्वास्थ्य- बच्चों के लिए विशेष एसएनसीयू और पीएनसी वार्ड के साथ उच्च स्तरीय लेबर रूम।
अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। भवन में कुल 5 लिफ्ट लगाई गई हैं, ताकि आवाजाही में भीड़ न हो। साथ ही, एक विशाल स्ट्रेचर रैंप भी बनाया गया है ताकि बिजली गुल होने या तकनीकी खराबी की स्थिति में मरीजों को स्ट्रेचर के माध्यम से सुरक्षित ऊपर-नीचे ले जाया जा सके।
सिविल सर्जन डॉ. शरद चौरसिया ने बताया कि प्रारंभ में भवन की अनुमानित लागत 29.81 करोड़ रुपए थी, लेकिन मरीजों के हित में जोड़ी गई अतिरिक्त आधुनिक सुविधाओं और उपकरणों के कारण यह लागत बढकऱ 32.50 करोड़ रुपए तक पहुंची है। इस ब्लॉक के संचालन से जिला अस्पताल के पास पहले से उपलब्ध करोड़ों रुपए की हाईटेक मशीनों का पूर्ण सदुपयोग हो सकेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिले से होने वाले रेफर केसों में भारी कमी आएगी, जिससे गरीब परिवारों का आर्थिक बोझ भी कम होगा।
Published on:
24 Feb 2026 10:47 am
