
जिला अस्पताल में रेबीज टीकाकरण
शहर की सडक़ों, गलियों और प्रमुख मोहल्लों में आवारा कुत्तों की बढ़ती तादाद और उनके लगातार बढ़ते हमलों से खौफजदा शहरवासियों के लिए राहत भरी खबर है। नगरपालिका प्रशासन ने आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए बहुप्रतीक्षित एनिमल बर्थ कंट्रोल (्रक्चष्ट) सेंटर स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। इस केंद्र के माध्यम से न केवल कुत्तों की नसबंदी की जाएगी, बल्कि शहर को डॉग बाइट की घटनाओं से मुक्त करने के लिए विशेष कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया गया है।
नगरपालिका की मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) माधुरी शर्मा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि एबीसी सेंटर का तकनीकी डिजाइन फाइनल कर लिया गया है। केंद्र के निर्माण और संचालन के लिए नए सिरे से निविदाएं (टेंडर) आमंत्रित की गई हैं। यह प्रक्रिया वर्तमान में गतिमान है और मार्च 2026 तक टेंडर खुलने की पूरी संभावना है। टेंडर प्रक्रिया संपन्न होते ही शहर के विभिन्न क्षेत्रों से कुत्तों को पकडऩे का अभियान शुरू होगा और सेंटर लाकर विशेषज्ञों की देखरेख में उनकी नसबंदी की जाएगी।
इस बार नगरपालिका केवल नसबंदी तक ही सीमित नहीं है। योजना के अनुसार, एक आधुनिक आश्रय स्थल भी बनाया जा रहा है। अक्सर देखा जाता है कि नसबंदी के बावजूद कुछ कुत्ते स्वभाव से अत्यधिक हिंसक बने रहते हैं और राहगीरों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा पैदा करते हैं। ऐसे खतरनाक श्रेणी के कुत्तों को चिह्नित कर इस आश्रय स्थल में रखा जाएगा। यहां पशु चिकित्सकों की निगरानी में उनका उचित इलाज होगा और उनके व्यवहार को सुधारने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि वे समाज के लिए खतरा न रहें।
नगरपालिका के लिए इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं रहा है। बीते दो वर्षों का रिकॉर्ड देखें तो इस राह में कई अड़चनें आई हैं।
पहली और दूसरी कोशिश- पिछले दो वर्षों में दो बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन किसी भी अनुभवी संस्था या योग्य ठेकेदार ने इस काम में रुचि नहीं दिखाई।
तीसरी कोशिश- तीसरी बार कुछ एजेंसियां आगे तो आईं, लेकिन तकनीकी जांच और सरकारी मापदंडों की कड़ी शर्तों पर वे खरी नहीं उतर सकीं।
अब चौथी बार की तैयारी- लगातार तीन बार की विफलता के बाद अब चौथी बार टेंडर प्रक्रिया की जा रही है। इस बार नियमों में कुछ बदलाव और बेहतर शर्तों के साथ अधिकारियों को उम्मीद है कि कोई सक्षम एजेंसी इस काम की जिम्मेदारी संभालेगी।
वर्तमान में छतरपुर के सौरा रोड, देरी रोड, बजरंग नगर, विश्वनाथ कॉलोनी और चौबे कॉलोनी जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में आवारा कुत्तों का जबरदस्त आतंक है। रात के समय बाइक सवारों और पैदल चलने वालों के पीछे कुत्तों का झुंड दौडऩा एक आम समस्या बन गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन पहले भी कई बार दावे कर चुका है, लेकिन अब कागजी कार्रवाई से आगे बढकऱ ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव के लिए जिला अस्पताल में पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। नेशनल हेल्थ मिशन के तहत अस्पताल में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और प्रतिदिन औसतन 80 से 90 मरीजों को निशुल्क एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई जा रही है। कुत्ते, बिल्ली, चूहे या अन्य आवारा जानवरों के काटने पर तुरंत इलाज अनिवार्य है, क्योंकि रेबीज से मौत निश्चित हो सकती है।
टीकाकरण केंद्र की इंचार्ज रितु त्रिवेदी ने बताया कि जिला अस्पताल में फिलहाल 4039 डोज का स्टॉक उपलब्ध है। नए प्रोटोकॉल के अनुसार इंट्राडर्मल रूट से वैक्सीनेशन किया जा रहा है, जिसमें खुराक त्वचा की ऊपरी परत में दी जाती है। यह कुल चार डोज में लगाई जाती है काटने के दिन, फिर तीसरे, सातवें और 28वें दिन। गंभीर मामलों में रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन भी उपलब्ध कराई जाती है।
सिविल सर्जन डॉ. शरद चौरसिया ने लोगों से अपील की है कि किसी भी जानवर के काटने या खरोंचने पर सबसे पहले घाव को साबुन और बहते पानी से 15-20 मिनट तक अच्छी तरह धोएं। इससे वायरस फैलने की संभावना काफी कम हो जाती है। इसके बाद तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचकर डॉक्टर से परामर्श लें। यदि किसी क्षेत्र में वैक्सीन की कमी हो तो जिला स्वास्थ्य अधिकारी को सूचित करें।
सीएमओ माधुरी शर्मा के अनुसार, इस बार बजट और संसाधनों की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। नगरपालिका का लक्ष्य है कि मार्च के बाद एबीसी सेंटर पूरी क्षमता के साथ काम करना शुरू कर दे, जिससे शहरवासियों को इस समस्या से हमेशा के लिए निजात मिल सके।
Published on:
23 Feb 2026 10:52 am
बड़ी खबरें
View Allछतरपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
