
Chhatarpur News : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के आदेश और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशन में शनिवार को मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला न्यायालय समेत जिले के तहसील न्यायालयों में नेशनल लोक अदालत लगई गई। लोक अदालत में आपसी सुलह और समझौते के माध्यम से बड़ी संख्या में लंबित प्रकरणों का निराकरण हुआ। लंबित प्रकरणों में कुल 12 करोड़ 26 लाख 66 हजार 986 रुपए के अवार्ड पारित किए गए, जिससे 2380 लोग लाभांवित हुए।
जिला न्यायालय छतरपुर में नेशनल लोक अदालत की शुरुआत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण छतरपुर रविन्द्र सिंह ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस मौके पर विशेष न्यायाधीश निवेदिता मुदगल, प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय राजेश कुमार देवलिया, जिला न्यायाधीश कविता वर्मा, जिला न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव, जिला न्यायाधीश निवेश कुमार जायसवाल, जिला न्यायाधीश निधि सक्सेना और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट स्वाति निवेश जायसवाल सहित न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।
नेशनल लोक अदालत के लिए जिला न्यायालय और जिले के तहसील न्यायालयों में कुल 28 खंडपीठों का गठन हुआ था। इन खंडपीठों के जरिए पक्षकारों की सहमति और आपसी सुलह-समझौते के आधार पर विभिन्न मामलों का निराकरण हुआ। इनमें आपराधिक प्रकरण, चैक बाउंस, मोटर दुर्घटना दावा, विद्युत, वैवाहिक और अन्य प्रकृति के मामले शामिल रहे। लंबित प्रकरणों के निराकरण में कुल 12 करोड़ 26 लाख 66 हजार 986 रुपये का अवार्ड पारित किया गया। इन मामलों के निराकरण से 2380 व्यक्ति लाभांवित हुए।
लोक अदालत में न्यायालय में मामला दर्ज होने से पहले के प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का भी आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निराकरण हुआ। कुल 1327 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण हुआ। इनमें बैंक संबंधी 125, विद्युत संबंधी 163, वाटर बिल के 760 और अन्य प्रकृति के 279 प्रकरण शामिल रहे। इन मामलों में कुल 1 करोड़ 25 लाख 61 हजार 193 रुपये के अवार्ड पारित किए गए और 1570 व्यक्ति लाभांवित हुए। इस तरह लोक अदालत के माध्यम से पक्षकारों को विवादों का त्वरित समाधान मिलने के साथ समय और धन की बचत का अवसर भी मिला।
नेशनल लोक अदालत में पारिवारिक विवादों के मामलों में समझाइश और आपसी सहमति से परिवारों को टूटने से बचाने के प्रयास भी सफल रहे। कुटुम्ब न्यायालय में लंबित ग्राम गढ़ीमलहरा निवासी परिवर्तित नाम भैयालाल रेकवार और रामरति रेकवार के मामले में करीब चार वर्ष पहले विवाह हुआ था। बाद में दोनों के बीच विवाद होने के कारण वे अलग-अलग रह रहे थे।
आवेदक ने हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत जिला न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया था। पारिवारिक प्रकृति के मामले को लोक अदालत में रखा गया। यहां दोनों पक्षों को समझाइश दी गई। समझाइश के बाद पति-पत्नी ने अपने मतभेद भुलाकर फिर साथ रहने पर सहमति जताई। दोनों खुशी-खुशी लोक अदालत से साथ रवाना हुए।
इसी तरह ग्राम एवं तहसील छतरपुर निवासी भी लोक अदालत में समझाइश के बाद समझौता हुआ। दोनों का करीब पांच वर्ष पूर्व मुस्लिम रीति-रिवाज से विवाह हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद पारिवारिक कारणों से विवाद हो गया और पत्नी वर्ष 2025 में मायके चली गई थी। पति द्वारा पत्नी को साथ ले जाने के लिए जिला न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया था। मामले को लोक अदालत में रखा गया, जहां दोनों पक्षों से संवाद कर उन्हें समझाइश दी गई। इसके बाद पति-पत्नी ने आपसी मतभेद समाप्त करते हुए फिर से साथ रहने का निर्णय लिया। दोनों खुशी-खुशी साथ लोक अदालत से रवाना हुए।
दोनों पारिवारिक मामलों में राजीनामा होने के बाद पति-पत्नी ने एक-दूसरे को फूलों की माला पहनाकर साथ रहने की सहमति पर खुशी जताई। इस मौके पर उन्हें न्याय, सौहार्द और नए जीवन की शुरुआत के प्रतीक के रूप में पौधा भी प्रदान किया गया। इसी तरह नेशनल लोक अदालत में हुए इन समझौतों से यह संदेश मिला कि, आपसी संवाद, समझाइश और सुलह-समझौते के माध्यम से विवादों का समाधान करने के साथ परिवारों को टूटने से भी बचाया जा सकता है।