
छतरपुर शहर की सडक़ों और शराब दुकानों पर इन दिनों अंकित मूल्य (एमआरपी) के नियम-कायदे पूरी तरह से हवा में उड़ा दिए गए हैं। शहर की सभी आठ शराब दुकानों पर मदिरा प्रेमियों से रोजाना खुलेआम लाखों रुपए की अतिरिक्त वसूली की जा रही है। आबकारी विभाग की अनदेखी और ठेकेदारों की दबंगई के चलते हर बोतल, केन और पाव (क्वार्टर) पर 20 रुपए से लेकर 70 रुपए तक की अवैध ओवररेटिंग की जा रही है। साथ ही शराब दुकानों के आसपास लोग खुलेआम शराब पी रहे हैं।
दुकानों पर मनमाने दाम पर बिक्री ने आबकारी व्यवस्था और मॉनिटरिंग सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। मदिरा दुकानों के करिंदे सरेआम ग्राहकों से तय कीमत से अधिक रकम वसूलते हुए कैमरे में कैद हुए हैं। जब ग्राहकों ने अंकित मूल्य (एमआरपी) पर सामान देने की बात कही, तो करिंदों ने बेबाकी से जवाब दिया कि अंकित मूल्य पर अब कुछ भी नहीं मिलता।
शराब दुकानों पर अंकित मूल्य से अधिक वसूले जा रहे रेट का पूरा विवरण
बडवाइजर बीयर (केन)- अंकित मूल्य 240 , वसूला जा रहा रेट 260 (20 अतिरिक्त)
अल्ट्रा मैक्स बीयर (केन)- अंकित मूल्य 220, वसूला जा रहा रेट 250 (30 अतिरिक्त)
किंगफिशर बीयर (बोतल)- अंकित मूल्य 230, वसूला जा रहा रेट 250 (20 अतिरिक्त)
रॉयल स्टैग मदिरा (पाव)- अंकित मूल्य 260, वसूला जा रहा रेट 270 (10 अतिरिक्त)
बोल्ट बीयर- अंकित मूल्य 180, वसूला जा रहा रेट 200 (20 अतिरिक्त)
अल्ट्रा मैक्स एवं बडवाइजर (बोतल)- अंकित मूल्य से कहीं ऊपर 350 से 370 तक में खुलेआम बेची जा रही हैं।
साढ़े तीन लाख की आबादी वाले छतरपुर शहर में मदिरा की बिक्री के आधार पर वसूली का गणित बेहद चौंकाने वाला है।न्यूनतम औसतन दैनिक वसूली- यदि शहर में रोजाना औसतन 10,000 लोग भी मदिरा की खरीदारी करते हैं, और उनसे न्यूनतम 20 प्रति व्यक्ति भी अतिरिक्त लिया जाता है, तो रोजाना 2 लाख रुपए की सीधी अवैध कमाई होती है। इस हिसाब से महीने का आंकड़ा 60 लाख बैठता है।
वास्तविक/संभावित वसूली (20 से 30 प्रतिशत वृद्धि के साथ)- कई ब्रांड्स पर 50 से 100 तक ज्यादा वसूलने के कारण यदि सूक्ष्मता से सर्वे और निष्पक्ष जांच हो, तो यह आंकड़ा 20 से 30 प्रतिशत और अधिक बैठता है।अंतिम आंकड़ा- रोजाना कम से कम 2.60 लाख (2,60,000 रुपए) की जबरन वसूली की जा रही है, जिससे हर महीने का आंकड़ा 75 लाख से अधिक पहुंच जाता है।
शहर के इन प्रमुख अड्डों पर चल रहा बेखौफ खेल
छतरपुर शहर के प्रमुख चौराहे और व्यस्त मार्ग इस ओवररेटिंग का गढ़ बन चुके हैं।
1. बस स्टैंड शराब दुकान
2. सागर रोड शराब दुकान
3. चौबे तिराहा शराब दुकान
4. सटई रोड शराब दुकान
5. पन्ना रोड शराब दुकान
इन सभी प्रमुख स्थानों पर बिना किसी खौफ के दिन-रात ओवररेटिंग का खेल जारी है और जिम्मेदार व्यवस्था पूरी तरह तमाशबीन बनी हुई है।पूरे प्रशासनिक और विभागीय सिस्टम पर उठे तीखे सवालशहर की सभी आठों दुकानों पर सरेआम हो रही इस लूट ने किसी एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे आबकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।निष्क्रिय मैदानी अमला- जब हर दुकान पर सरेआम ओवररेटिंग हो रही है, तो विभाग का मैदानी अमला और नियमित चेकिंग दस्ता क्या कर रहा है?
जिस आबकारी अमले को दुकानों पर जाकर रेट लिस्ट जांचनी चाहिए थी और नियमों का पालन कराना चाहिए था, वह केवल दफ्तरी औपचारिकताएं निभाने तक सीमित क्यों है?
सिस्टम की खामोशी- लगातार सामने आ रही शिकायतों के बावजूद आबकारी और प्रशासनिक तंत्र की यह खामोशी यह दर्शाती है कि कहीं न कहीं पूरा सिस्टम ठेकेदारों की मनमानी के आगे पस्त और लाचार साबित हो रहा है।
शराब दुकानों के आसपास किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियां, निर्धारित दर से अधिक कीमत (ओवररेटिंग) पर शराब की बिक्री और सार्वजनिक स्थानों या दुकान परिसर में शराब का सेवन कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी शराब दुकान संचालकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी दुकान या परिसर में किसी भी ग्राहक को शराब पीने की अनुमति न दें और आबकारी नियमों का शत-प्रतिशत कड़ाई से पालन करें। टीम को चेकिंग के निर्देश दिए हैं, चेकिंग शुरू भी हो गई है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ वैधानिक व दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अमृता जैन, जिला आबकारी अधिकारी