नगर निगम पिछले पांच साल से कर्जे में फंसा है तो वहीं आर्थिक रूप से कंगाल होने से कर्मचारियों के वेतन के लाले पड़े हैं। किसी वार्ड में सडक़, नाली, पुल-पुलियों का निर्माण नहीं हो पा रहा है। ऐसे हालत में निगम ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 43 करोड़ रुपए का टैक्स समेत राजस्व अर्जित किया है। यह राजस्व पिछले वित्तीय वर्ष 2023-24 के मुकाबले 17 करोड़ रुपए ज्यादा है।
नगर निगम पिछले पांच साल से कर्जे में फंसा है तो वहीं आर्थिक रूप से कंगाल होने से कर्मचारियों के वेतन के लाले पड़े हैं। किसी वार्ड में सडक़, नाली, पुल-पुलियों का निर्माण नहीं हो पा रहा है। ऐसे हालत में निगम ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 43 करोड़ रुपए का टैक्स समेत राजस्व अर्जित किया है। यह राजस्व पिछले वित्तीय वर्ष 2023-24 के मुकाबले 17 करोड़ रुपए ज्यादा है।
निगम की राजस्व शाखा के अनुसार 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2024-25 में नगर निगम पूरे प्रदेश के इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर जैसे बड़े नगर निगम को छोडकऱ 11 नगर निगमों में प्रथम आया है। जिसमें छिंदवाड़ा नगर निगम ने 86.23 प्रतिशत आय हासिल की है। जबकि पिछले साल यह आय 64.52 प्रतिशत थी। इस आय में प्रापर्टी टैक्स 15.27 करोड़, जल टैक्स 7.26 करोड़, किराया 1.81 करोड़, बिल्डिंग परमिशन 2.53 करोड़, और विविध चार्ज 16.25 करोड़ रुपए शामिल है।
पिछले वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल राजस्व आय 26.11 करोड़ रुपए थी। जिसमें प्रापर्टी टैक्स 14 करोड़, जल टैक्स 4.54 करोड़, किराया 1.65 करोड़, बिल्डिंग परमिशन 2 करोड़, विविध चार्ज 3.92 करोड़ तथा विविध चार्ज 26.21 करोड़ रुपए शामिल थी। इस तरह नगर निगम ने टैक्स समेत राजस्व वसूली में 17 करोड़ रुपए अधिक हासिल किए हैं। यह राशि 21 प्रतिशत अधिक है। राजस्व अधिकारी साजिद खान का कहना है कि नगर निगम राजस्व वसूली में पूरे प्रदेश के 16 नगर निगम में अव्वल आया है। आगे वित्तीय वर्ष 2025-26 में हम और बेहतर कार्य करेंगे।
इस राजस्व वसूली से एक बात और साफ हो गई है कि नगर निगम के टैक्स देने में छिंदवाड़ा शहर का करदाता सबसे ज्यादा ईमानदार है। कुछ अपवाद को छोड़ दिया जाए तो हर मकान मालिक ने समय पर प्रापर्टी और जल टैक्स पटाया। इसके अलावा व्यवसायियों ने दुकान किराया, मकान निर्माण करनेवालों ने बिल्डिंग परमिशन और अलग-अलग शुल्क भी समय पर पटाए। इसकी वजह से नगर निगम पूरे प्रदेश में अव्वल आया।
नगर निगम के कर्मचारियों की एक माह की तनख्वाह 3.50 करोड़ रुपए है। इस हिसाब से 12 माह की तनख्वाह 42 करोड़ रुपए होती है। इससे ज्यादा राजस्व 43.12 करोड़ रुपए नगर निगम ने अर्जित किया है। इसके अलावा प्रतिमाह की चुंगी क्षतिपूर्ति राशि अलग आती है। इसके साथ ही सडक़ मरम्मत समेत अन्य दूसरी मदों से भी राशि सरकार से मिलती रही है। फिर भी निगम का कर्मचारियों की तनख्वाह समय पर न देना आश्चर्य जनक है।