चित्रकूट

मोदी के फैसले के बाद BSP दफ्तर में मचा था हड़कंप, गाड़ी में बैग भर-भर के भागने लगे थे नेता

एक गाड़ी में बैग भर के वापस आने के बाद दूसरी गाड़ी अंदर जा रही थी और उसमें बैग भरे जा रहे थे।
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Updated: 8 Nov 2017, 12:51 PM IST
BSP leaders and candidatein BSP Lucknow party office after demonetisat
मोदी के फैसले के बाद BSP दफ्तर में मचा था हड़कंप, गाड़ी में बैग भर-भर के भागने लगे थे नेता

लखनऊ. 8 नवंबर फिर से आ गया। तारीख 8 नवंबर 2016, दिन मंगलवार और समय था रात 8 बजे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक देश का सबसे बड़ा फैसला या कहें एक क्रांतिकारी ऐलान करते हुए 500 और 1000 के नोटों को बैन कर दिया था। आज 8 नवंबर 2017 को पीएम मोदी के उसी फैसले को एक साल पूरे हो गए हैं। कुछ लोग तो 8 नवंबर को भूल गये होंगे, लेकिन कुछ लोग जिंदगी भर नहीं भूले सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस ऐतिहासिक फैसले के लगभग 50 दिनों तक पूरे पूरे देश में अफरा-तफरी का माहौल था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में ऐलान के बाद उस समय अचानक बसपा के दफ्तर में भी भागदौड़ शुरू हो गई थी। बसपी ऑफिस की चहलकदमी उस समय अचानक सुर्खियों में भी आई थी।

बसपा दफ्तर में बढ़ी थी गहमागहमी

पीएम नरेंद्र मोदी के 1000 और 500 के नोट बैन के बाद राजधानी लखनऊ स्थित बसपा दफ्तर में काफी गहमागहमी बढ़ गई थी। अचानक करीब 100 गाडियां बसपा दफ्तर पहुंची थीं। बसपा दफ्तर पहुंचने वालों में न सिर्फ विधानसभा उम्मीदवार थे बल्कि पार्टी के जिम्मेदार नेता भी शामिल थे। साथ ही सभी गाड़ियों में ब्रीफकेस और बैग भरे हुए थे। सभी गाडियां एक-एक करके अन्दर जा रहीं थीं और उनके वापस आने के बाद ही दूसरी गाड़ी को अन्दर जाने की इजाजत थी। इस घटना को देखने वालों के मन में कई तरह के प्रश्न घूमने लगे थे।

अचानक पहुंचा था गाड़ियों का हुजूम

हालांकि उस समय बसपा नेताओं का कहना था कि यहां प्रत्याशियों की मीटिंग थी और जो बैग अन्दर गए हैं उनमें चुनाव के पम्पलेट भरे हुए थे। इन्हें प्रचार के लिए भेजा जाने वाला था। खास बात ये है कि जिस बसपा कार्यालय में केवल तीन नेताओं की गाड़ी को प्रवेश दिया जाता था, उसी कार्यालय का मुख्य द्वार सभी प्रत्याशियों की गाड़ियों के लिए खोल दिए गया था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद हर तरफ तरह- तरह के सवाल उठने लगे थे।

'नोटों की गड्डियां वापस लौटाने के लिए आई थीं गाड़ियां'

वहीं इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने 8 नवंबर को देर रात अपने उस समय के मुख्य सलाहकार नसीमुद्दीन सिद्दीकी और सतीश चन्द्र मिश्रा से मुलाकात की और आनन फानन में पार्टी के प्रत्याशियों की बैठक बुलाई थी। वहीं उस समय इस बैठक को लेकर विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि मायावती ने टिकट के बदले लिए गए नोटों की गड्डियां वापस लौटाने के लिए पार्टी प्रत्याशियों को बुलाया था, जिसे बैठक का नाम दिया गया था। विपक्षियों ने आरोप लगाया था कि पार्टी कार्यालय के भीतर ही नोटों से भरे बैग प्रत्याशियों की गाड़ियों में रखवाए जाने थे इसीलिए उन्हें कार्यालय में प्रवेश दिया गया था।

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