शिक्षकों की खौफनाक दास्तान, शोर मचाने पर था गोली मारने का आदेश, डकैतों को जंगल में तलाश रही यूपी-एमपी की पुलिस
चित्रकूट. डकैतों के चंगुल से छूट अपह्रत शिक्षकों ने दबी जुबान में अपने अपहरण की खौफनाक दास्तां बताई। डकैतों के चंगुल से मुक्त हुए शिक्षक फूलसिंह गौड़ व रामप्रताप पटेल ने बताया कि पिछले 23 दिसंबर की शाम 5 बजे के करीब डकैतों ने उनको अगवा कर लिया था। अपहरण के बाद उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी गई थी। गैंग की पकड़ से छूटने तक डकैतों ने उनकी पट्टी नहीं खोली। डकैत जंगल में जहां भी जाते थे, उन्हें अपने साथ ले जाते थे। शिक्षकों ने बताया कि डकैतों ने उन्हें पांच दिन तक जंगल की खाक छनवाते रहे। उन्हें करीब 30 किलोमीटर पैदल चलवाया।
पकड़ से छूटे शिक्षकों ने जानकारी देते हुए बताया कि अपहरण के समय सभी डकैत अपने मुंह ढके हुए थे। लगभग 2 किलोमीटर दूर ले जाने के बाद डकैतों ने उन्हें यह कहते हुए पीटना शुरू कर दिया कि उनकी मुखबिरी की वजह से थर पहाड़ इलाके में फ़ोर्स तैनात हो गई है। इससे उन्हें (डकैतों को) काफी दिक्कतें हो रही हैं। शिक्षकों ने बताया कि पुलिस के मूवमेंट की जानकारी मिलने पर डकैत उनपर बंदूक तान कर धमकी देते थे कि यदि शोर मचाया तो गोली मार दी जाएगी, गैंग सरगना नवल का भी यही आदेश था। डकैत अपने सरगना को 'गुरू' कहकर संबोधित करते थे।
खाने में नमक-रोटी और नमकीन बिस्किट
शिक्षकों ने बताया कि अपहरण के दौरान डकैतों नमक-रोटी, नमकीन और बिस्किट खाने के लिए देते थे। पहले दिन नमक-रोटी और दूसरे दिन बिस्किट व नमकीन दी गई। तीसरे दिन किसी मुखबिर के घर से आई रोटी व चने की सब्जी दी गई। चौथे दिन बैंगन का भर्ता व रोटी दी गई और पांचवें दिन यानी पकड़ से छोड़ने के पहले अपह्रत शिक्षकों को सिर्फ नमकीन दी गई थी।
जंगलों में कॉम्बिंग कर रही यूपी-एमपी की पुलिस
वारदात में दस्यु सरगना नवल धोबी का नाम सामने आ रहा है। उसकी दहशत के चलते इस समय चित्रकूट व सतना के सीमावर्ती इलाके खौफ के साये में सांस लेने को मजबूर हैं। शिक्षकों के छूटने के बाद अब खाकी के राडार पर दस्यु नवल गैंग प्रमुख रूप से है। खासकर मध्य प्रदेश पुलिस इस गैंग के सफाये के लिए कमर कसते हुए पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की चित्रकूट पुलिस के साथ जंगलों में सर्चिंग ऑपरेशन चला रही है।
डकैतों ने दो शिक्षकों का किया था अपहरण
डकैतों ने करीब एक हफ्ता पहले चित्रकूट और सतना (मध्य प्रदेश) की सीमा पर स्थित थर पहाड़ गांव से सरकारी प्राथमिक विद्यालय के दो शिक्षकों का अपहरण कर लिया था। अपहरण के समय दोनों शिक्षक अपने घर वापस लौट रहे थे। शिक्षकों को अगवा करने के बाद डकैतों ने उनके परिजनों के पास उन्हीं (शिक्षकों) के मोबाईल से फोन करते हुए 5-5 लाख की फिरौती देने की मांग की और रकम न देने पर बुरा अंजाम भुगतने की धमकी दी थी।
तो क्या फिरौती देने के बाद छूटे शिक्षक
शिक्षकों की रिहाई को खाकी भले ही अपना दबाव बता रही हो, लेकिन बीहड़ के सूत्रों व इलाकाई जानकारी के मुताबिक, डकैतों को फिरौती की रकम देने के बाद दोनों अध्यापक मुक्त हुए हैं। हां यह बात जरूर थी कि डकैतों ने जहां दोनों अपहर्ताओं के परिजनों से 10 लाख की फिरौती मांगी थी, वहीं अंतिम रूप से काफी मिन्नतों के बाद गैंग ने ढाई लाख रुपये में डील फाइनल की। यही नहीं दोनों शिक्षकों में एक से फिरौती नहीं ली गई, क्योंकि उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी न होने की दुहाई दी गई।