सदर विधायक व जिलाधिकारी मौके पर पहुंचे और विभागीय लम्बरदारों को तलब कर पूरी वस्तु स्थिति की जानकारी प्राप्त की...
चित्रकूट. इसे सिस्टम की बेचारगी लाचारी लापरवाही उदासीनता या जो भी आपके जेहन में आए वो कहें कि 17 वर्षों बाद एक टंकी की हलक में पानी उतर सका यानि पिछले 17 सालों से उक्त टंकी सिर्फ शो पीस के रूप में जनता को रिझाती रही लेकिन उसकी प्यास न बुझा सकी। 17 वर्षों के दौरान प्रदेश में तीन सरकारों ने सत्ता की मखमली कुर्सियों का उपभोग किया लेकिन इस इस टंकी की याद किसी को नहीं आई। अलबत्ता एक बात जरूर थी कि अपने निर्माण के बाद से आज तक पानी की सप्लाई के लिए तरसती यह पानी की टंकी उस सिस्टम की पोल जरूर खोल रही थी जिसे सुधरने में शायद कई युग बीत जाएंगे। अब जबकि प्रदेश का निजाम बदल चुका है तो जनता ने दोबारा अपने जनप्रतिनिधि और प्रशासन का ध्यान इस सफेद हांथी रूपी समस्या की ओर आकृष्ट कराया। जनता की नब्ज को समझते हुए सदर विधायक व जिलाधिकारी मौके पर पहुंचे और विभागीय लम्बरदारों को तलब कर पूरी वस्तु स्थिति की जानकारी प्राप्त की। अधिकारीयों कर्मचारियों द्वारा इतिहास भूगोल की जानकारी देने के बाद आक्रामक तेवर में आए विधायक व डीएम की संयुक्त पहल से टंकी में जलापूर्ति शुरू करवाई गई। पानी की सप्लाई होने से इस टंकी के माध्यम से दो दर्जन से अधिक छोटे बड़े मोहल्लों की प्यास बुझ सकेगी उन्हें पानी मिल सकेगा आसानी से।
17 सालों से पानी के लिए तरस रही थी टंकी
सरकारी व प्रशासनिक वयवस्था किस कदर अव्यवस्था की पगडंडियों पर जनता के हितों को धक्का देती है इसकी बानगी आए दिन देखने को मिलती है। कुछ ऐसी ही तस्वीर सामने आई चित्रकूट में जहां पिछले 17 सालों से लोगों की प्यास बुझाने के लिए बनाई गई पानी की टंकी सूखी रहकर सिस्टम को मुंह चिढ़ा रही थी। पिछले इतने वर्षों के दौरान न जाने वो कौन सी रहस्यमय मजबूरी थी जिसकी वजह से टंकी में पानी की सप्लाई शुरू न हो सकी। बहरहाल बीती ताहि बिसार दे की तर्ज पर पहल करते हुए बीजेपी के सदर विधायक व जिलाधिकारी के प्रयास से टंकी में जलापूर्ति चालू हो गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि जिस इलाके में यह टंकी है वहां अब पानी की किल्लत से निपटने में इलाकाई बाशिंदों को आसानी होगी।
पानी की टंकी बनी थी शोपीस
जनपद मुख्यालय अंतर्गत सीतापुर कस्बे में वर्ष 2000-01 में पेयजल पुनर्गठन योजना के तहत 1100 किलो लीटर की क्षमता वाली पानी की टंकी का निर्माण करवाया गया था। तब से लेकर आज तक यानि 17 सालों के बीच सपा और बसपा सूबे में सत्ता सुख भोग चुकी है। लेकिन उक्त दोनों सरकारों में यह टंकी अपना हलक तर करने यानी पानी की सप्लाई के लिए तरसती रही और शो पीस बनकर इलाके की शोभा बढ़ाती रही। विकास के आईने में सिस्टम को चिढ़ाती रही यह टंकी।
सदर विधायक व डीएम की पहल से शुरू हुई पानी की सप्लाई
जनता ने कई बार साहब लोगों से लेकर वोट लेकर विधानसभा पहुंचे माननीयों को इस समस्या के बारे में अवगत कराया लेकिन आश्वासन की घुट्टी पिलाते हुए समाधान को बन्द पिटारे में डाल दिया गया। एक बार फिर प्रदेश का निजाम बदलने पर जनता से किए गए वादों की दुहाई देते हुए बीजेपी के सदर विधायक चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय को इस समस्या के बारे में पुनः अवगत कराया खुद स्थानीय लोगों ने व जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी को भी इस बात की जानकारी दी। समस्या निस्तारण की त्वरित पहल करते हुए सदर विधायक व डीएम ने सीतापुर पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी ली। पूरी कहानी सुनने के बाद जल निगम व जल संस्थान के जिम्मेदारों को सब कुछ जांच परख कर पानी की सप्लाई शुरू करने के निर्देश दिए गए।
बिछाई गई पाइप लाइन फिर उखाड़ दी गई
मुख्यालय स्थित पाठा जलकल से सीतापुर कस्बे(जहां टंकी स्थित है) तक 7 किलोमीटर लम्बी पाइप लाइन उक्त टंकी तक पानी की सप्लाई के लिए बिछाई गई थी। वर्ष 2005 में चित्रकूट में आयोजित सपा के चिंतन शिविर के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की घोषणा के मुताबिक पाइप लाइन जाने वाले रास्ते( बेड़ी पुलिया से रामघाट) में सड़क निर्माण कराया गया। इस निर्माण के दौरान पाइप लाइन को उखाड़ दिया गया और फिर उसके बाद इस पाइप लाइन को जोड़ने की जहमत नहीं उठाई गई। लेकिन इतने सालों तक टंकी में पानी की सप्लाई नहीं हो पाई।