चित्तौड़गढ़

Chittorgarh: सवा किलो तक का उगाया सीताफल; उत्कृष्टता केंद्र का कमाल, 29 किस्मों से बढ़ेगा किसानों का मान

Custard Apple Center of Excellence: चित्तौड़गढ़। खेती-किसानी के बदलते दौर में अब पारंपरिक फसलों की जगह उद्यानिकी फसलें किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है। इसी कड़ी में सीताफल उत्कृष्टता केन्द्र में सीताफल की 29 प्रकार की किस्म तैयार की गई है।

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सीताफल उत्कृष्टता केंद्र में सवा किलो वजन का फल, पत्रिका फोटो

Custard Apple Center of Excellence: चित्तौड़गढ़। खेती-किसानी के बदलते दौर में अब पारंपरिक फसलों की जगह उद्यानिकी फसलें किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है। इसी कड़ी में सीताफल उत्कृष्टता केन्द्र में सीताफल की 29 प्रकार की किस्म तैयार की गई है। इन सभी की अलग-अलग विशेषता है। किसी का फल 800 से 1000 ग्राम तक होता है तो किसी में पल्प की मात्रा अधिक और बीज नाम मात्र के होते हैं।

आमतौर पर खेतों और जंगलों में पाए जाने वाले पारंपरिक सीताफल में बीजों की संख्या बहुत अधिक होती है और पल्प (गूदा) काफी कम होता है। इसके अलावा, पारंपरिक फल जल्दी खराब हो जाते हैं, जिससे किसानों को दूर की मंडियों तक माल पहुंचाने में काफी परेशानी होती है। इस परेशानी को दूर करने के लिए सीताफल उत्कृष्टता केन्द्रों में सीताफल की कई किस्म तैयार की गई है।

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इन सभी की अलग-अलग विशेषताएं हैं। केन्द्र की ओर से यह किसानों को पिछले दो-तीन साल से उपलब्ध भी कराए जा रहे हैं। इसके कारण पारंपरिक के साथ ही नई किस्म के तैयार पौधों से होने वाले सीताफल बाजार में उपलब्ध हो रहे हैं। मेवाड़ में चित्तौड़गढ़, राजसमंद और उदयपुर में सीताफल की पैदावार सितंबर से दिसंबर माह तक होती है।

आधा किलो से सवा किलो तक होता है वजन

चित्तौड़गढ़ सीताफल उत्कृष्टता केन्द्र में एनएमके-1 गोल्डन किस्म का पौधे के एक ही फल का वजन 500-1000 ग्राम तक होता है। इसी प्रकार सरस्वती किस्म के पौधे का भी फल 500 ग्राम से 1.25 किलोग्राम तक होता है। इसमें 75 प्रतिशत पल्प और बामुश्किल 15-20 बीच होते हैं। उत्कृष्टता केन्द्र में पिछले साल सरस्वती के एक पेड़ में करीब सवा किलो का सीताफल लगा था।

केन्द्र में 29 प्रकार की किस्में तैयार

केन्द्र में सीताफल की किस्मों पर लगातार शोध किया जा रहा है। केन्द्र पर वर्तमान में 29 तरह की किस्में तैयार है। इसमें एनएमके एक गोल्डन, समृद्धि-दो, सिंधन, बालानगर, सरस्वती, एनएमके-2, ऑटोमाया, बीएक्स ए. जीजेसीए एक, एनोना-2, एनोना 7, एपीके एक, लाल सीताफल, एनएम 3, लाल सीताफल-दो, फिंगर प्रिंट्स, चंदा सीडलिंग, रायदुर्ग, वाशिंगटन जैन, अर्का सहन, पिंक मैमोथ, चांद सिली, रामफल, एनोना ग्लेबा, मेरी मोया, मेमोथ, समृद्धि एक, फूले पुरंदर, चित्तौड़ सलेक्शन शामिल है। इन पौधों 3-4 साल में फल लगने लग जाते हैं।

यह होगा फायदा

  • उन्नत किस्म में ज्यादा पल्प और कम बीज निकलता है।
  • ये फल तोड़ने के बाद कुछ दिन तक सुरक्षित रहते हैं
  • इनका वजन 500 ग्राम से डेढ़ किलो तक होता है।

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Published on:
17 Jan 2026 12:01 pm
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