चित्तौड़गढ़

Rajasthan News : 8 साल बाद घर तो लौटा राघव, लेकिन न चेहरे पर मुस्कान थी, न कंधों पर बैग; सिर्फ ताबूत और सिसकियां

Rajasthan News : सात समंदर पार सुनहरे भविष्य के सपने बुनने गए बेगूं के बेटे राघव सोनी (32) की अंतिम विदाई ने हर आंख भिगो दी। 14 दिन पहले कनाडा की ठंडी हर्ट लेक झील में जिस राघव की सांसें थम गई थीं, उसका पार्थिव शरीर जब घर पहुंचा, तो बूढ़ी आंखों का सब्र टूट गया।
2 min read
Raghav Soni death Canada
फोटो पत्रिका नेटवर्क

बेगूं (चित्तौड़गढ़)। सात समंदर पार सुनहरे भविष्य के सपने बुनने गए बेगूं के बेटे राघव सोनी (32) की अंतिम विदाई ने हर आंख भिगो दी। 14 दिन पहले कनाडा की ठंडी हर्ट लेक झील में जिस राघव की सांसें थम गई थीं, उसका पार्थिव शरीर जब घर पहुंचा, तो बूढ़ी आंखों का सब्र टूट गया। जिस बेटे के लौटने की राह परिवार खुशियों के साथ देख रहा था, वह ताबूत में लिपटा लौटा।

एक 'नाम' के फेर में फंसी ममता की पुकार: यह केवल एक मौत नहीं, बल्कि अपनों को खोने के बाद व्यवस्थाओं से लड़ने की एक मर्मस्पर्शी दास्तां भी है। 11 अप्रेल को नाव हादसे के बाद जब राघव की मौत हुई, तो परिवार पर दुखों का सैलाब उमड़ पड़ा। लेकिन त्रासदी तब और गहरी हो गई जब दस्तावेजों में दर्ज 'राघव सोनी' और कंपनी रिकॉर्ड के 'राघवेंद्र सिंह' के बीच की तकनीकी दीवार शव को घर लाने में बाधा बन गई। 14 दिनों तक पिता की ममता और परिवार की बेबसी फाइलों के चक्कर काटती रही।

सत्ता के गलियारों तक पहुंची चीख

जब कागजी उलझनों ने शव को कैद कर लिया, तब चित्तौड़गढ़ से लेकर दिल्ली तक प्रयास शुरू हुए। सांसद सीपी जोशी, पूर्व निदेशक चर्मेश शर्मा और विधायक डॉ. सुरेश धाकड़ ने दिल्ली के गलियारों और भारतीय दूतावास में पैरवी की। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय तक लगी गुहार के बाद आखिर 'राघव' और 'राघवेंद्र' की पहचान एक हुई और वतन वापसी का रास्ता साफ हुआ।

अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

शुक्रवार को दिल्ली पहुंचने के बाद शनिवार सुबह जैसे ही एम्बुलेंस बेगूं की गलियों में दाखिल हुई, सन्नाटा चीखों में बदल गया। राघव पिछले 8 वर्षों से कनाडा में कंप्यूटर इंजीनियर थे, लेकिन अपनी जड़ों से उनका जुड़ाव बना हुआ था। अंतिम संस्कार में उमड़ी हजारों की भीड़ इस बात की गवाह थी कि कस्बे ने अपना एक होनहार खो दिया है। गमगीन माहौल में स्थानीय श्मशान घाट पर राघव का अंतिम संस्कार किया गया।

बेटा, अब तो सो जा अपनी माटी में

घर के आंगन में जब राघव का शव रखा गया, तो उसकी मां और परिजनों का विलाप सुन हर पत्थर दिल पिघल गया। 14 दिनों का इंतजार उस समय बेहिसाब दर्द में बदल गया जब लिपटा हुआ बेटा घर की दहलीज पर आया। पूरा कस्बा इसी गम में डूबा रहा।

Updated on:
26 Apr 2026 02:52 pm
Published on:
26 Apr 2026 02:52 pm