Three-digit VIP number Fraud: चित्तौड़गढ़। प्रादेशिक एवं सड़क सुरक्षा कार्यालय हाजा चितौड़गढ़ में जिस नंबर पर ऑटो रिक्शा दर्ज है, फर्जी दस्तावेज तैयार कर एक व्यक्ति ने उसी नंबर पर अपनी कार रजिस्टर्ड करवा ली।
Three-digit VIP number Fraud: चित्तौड़गढ़। प्रादेशिक एवं सड़क सुरक्षा कार्यालय हाजा चितौड़गढ़ में जिस नंबर पर ऑटो रिक्शा दर्ज है, फर्जी दस्तावेज तैयार कर एक व्यक्ति ने उसी नंबर पर अपनी कार रजिस्टर्ड करवा ली। एक और इसी तरह का मामला सामने आया, जिसे लेकर परिवहन निरीक्षक ने दोनों मामलों में पुलिस प्रकरण दर्ज करवाया। परिवहन विभाग में बीते माह थ्री डिजिट वीआइपी नंबरों के फर्जीवाड़े का खुलासा हो चुका है जिसमें विभाग के ही करीब 450 से ज्यादा अफसर और कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई है।
परिवहन निरीक्षक किशनलाल तेली की शिकायत पर सदर थाना पुलिस ने राजेश कुमार व रूप सिंह नामक दो आरोपितों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया। पुलिस प्रकरण में लिखा है कि वाहन संख्या आरएस- एच- 0656 का प्रादेशिक परिवहन एवं सड़क सुरक्षा कार्यालय हाजा चितौड़गढ़ में ऑनलाईन पंजीयन रिकार्ड के अनुसार जीप होकर राजेश कुमार पुत्र गणपत निवासी कुंभानगर चितौड़गढ़ है। जबकि प्रादेशिक परिवहन एवं सड़क सुरक्षा कार्यालय चितौड़गढ़ में संधारित मूल रिकार्ड के अनुसार उक्त वाहन ऑटोरिक्शा होकर दलीचंद पुत्र छोगालाल निवासी सदर बाजार चितौड़गढ़ के नाम दर्ज है।
राजेश कुमार ने बदनीयति से वाहन का बैकलॉक षडयंत्र पूर्वक कुटरचित फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर इस पंजीकृत वाहन को कार के रूप में ऑनलाईन दर्ज करवा लिया। इसी प्रकार एक अन्य वाहन संख्या आरजे-एच-0258 का प्रादेशिक परिवहन एवं सड़क सुरक्षा कार्यालय हाजा, चित्तौड़गढ़ में ऑनलाईन पंजीयन रिकॉर्ड के अनुसार कार होकर रूप सिंह पुत्र कान सिंह, निवासी 205 कुंभानगर, चित्तौड़गढ़ है।
जबकि वाहन 4.0 पर बैकलॉग करते समय जो पंजीयन प्रमाण-पत्र अपलोड किया गया, मूलचंद पुत्र सेवाराम, निवासी नीमच (मप्र) के नाम पंजीकृत निकला। रूप सिंह ने वाहन का बैकलॉग षडयंत्र पूर्वक बदनीयती से कूटरचित फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर इस पंजीकृत वाहन को कार के रूप में ऑनलाईन दर्ज करवा लिया। परिवहन निरीक्षक की शिकायत पर पुलिस ने दोनों ही मामलों में राजेश व रूप सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
परिवहन विभाग के जयपुर समेत कई कार्यालयों में थ्री डिजिट फर्जीवाड़े का खेल बीते माह उजागर हो चुका है। मामले में विभाग के ही 450 से अधिक कार्मिकों की संलिप्तता सामने आ चुकी है। कई कार्मिकों के खिलाफ विभाग ने एफआइआर भी दर्ज कराई वहीं एक हजार से अधिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन भी विभाग ने रद्द किया है।
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