चित्तौड़गढ़ किले के जैन मंदिर में चोरी के बाद सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है। अब रात में तैनात गार्ड हर 30 मिनट में जीपीएस लोकेशन और टाइम वॉटरमार्क के साथ सेल्फी अपलोड करेंगे, ताकि गश्त की निगरानी रियल टाइम में हो सके।
चित्तौडगढ़। 'जागते रहो' रात के सन्नाटे को चीरती यह पारंपरिक आवाज अब धीरे-धीरे बंद होने वाली है। अब हाईटेक फार्मूले के तहत पहरेदारों की उपिस्थति भी डिजिटल हो रही है। उन्हें प्रत्येक 18 मिनट में सेल्फी के साथ अपनी उपिस्थति दर्ज करानी होगी। यह फार्मूला पुरातत्व विभाग लेकर आया है। दरअसल चित्तौडगढ़ किले के जैन मंदिर में गत माह हुई चोरी की वारदात ने महकमे की नींद उड़ा दी है। सुरक्षा में लगी इस बड़ी सेंध के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ठेका ऐजेंसी ने एक ऐसा हाईटेक आदेश जारी किया है, जिसने सुरक्षाकर्मियों को रात में गश्त करने के लिए चाकचौबंद कर दिया है।
अब किले में रात को गश्त करने वाले होमगार्डस और सुरक्षाकर्मियों को हर आधे घंटे में अपनी लोकेशन के साथ फोटो खींचकर सेल्फी ग्रुप पर अपलोड करनी होगी। मतलब राजस्थान के ऐतिहासिक दुर्ग की सुरक्षा अब केवल लाठी और टॉर्च के भरोसे नहीं रहेगी। अब मुस्तैदी सिर्फ कागजों में नहीं बल्कि सीधे डिजिटल स्क्रीन पर दिखेगी।
हाल ही में किले के भीतर स्थित प्राचीन जैन मंदिर में चोरों ने सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए धावा बोला था। इस घटना के बाद राज्य स्तर पर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। जांच में सामने आया कि ड्युटी में तैनात गार्ड मंदिर के बाहर ही गश्त करने के बजाय सुरक्षित जगह पर आराम फरमा रहे थे। इसी लापरवाही को जड़ से खत्म करने के लिए अब यह नया डिजिटल चक्रव्यू रचा गया है। ड्यूटी पर तैनात हर गार्ड को रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक हर आधे घंटे में अपनी लाइव फोटो भेजनी होगी। फोटो साधारण नहीं होगी। उसमें जीपीएस लोकेशन और समय का वाटरमार्क होना अनिवार्य है, ताकि कोई पुरानी फोटो अपलोड न कर सके।
चित्तौडगढ़ दुर्ग पर कीर्तिस्तंभ के निकट प्राचीन जैन मंदिर में 16-17 अप्रेल की रात चोर दो अष्टधातु की मूर्तियों सहित चांदी के छत्र व दानपात्र से नकदी चुरा ले गए थे। वारदात के समय ड्युटी में तैनात दो गार्ड मंदिर के निकट ही सो रहे थे। हालांकि पुलिस ने चोरी की वारदात का खुलासा करते हुए मूर्तियां बरामद कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। वहीं पुरातत्व विभाग के अधीन गार्ड उपलबध कराने वाली एसआईएस कंपनी ने लापरवाही से सबक लेते रात्रि में गार्डों के लिए नई व्यवस्था लागू की है। दुर्ग पर प्राचीन स्मारकों की सुरक्षा के लिए 36 गार्ड दिन-रात अलग-अलग समय में ड्युटी पर रहते हैं। रात के समय दस गार्ड स्मारकों व मंदिरों की सुरक्षा में रहते हैं।
गुगल मेप कैमरे से समय के साथ गार्ड को स्मारक को चेक करते हुए फोटो अपलोड करना है। अब इसमें समय कम करते हुए 30 मिनट कर दिया गया है। दुर्ग पर स्मारकों की सुरक्षा व गार्ड की ड्युटी को लेकर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
-देवेंद्रसिंह सोंलकी, सिक्योरिटी सुपरवाईजर एसआईएस कपंनी, दुर्ग चित्तौडगढ़