Adventure Inspiration Story: उम्र की उस दहलीज पर जहां लोग रिटायरमेंट और आराम की योजना बनाते हैं, चित्तौड़गढ़ के 51 वर्षीय श्रीकृष्ण रावल बर्फीले तूफानों से रुबरू हो रहे हैं। पिछले 20 साल में हिमालय की 16 दुर्गम चोटियों पर तिरंगा फहराकर उन्होंने साबित कर दिया है कि 'संकल्प के आगे हिमालय भी बौना है'।
Adventure Inspiration Story: उम्र की उस दहलीज पर जहां लोग रिटायरमेंट और आराम की योजना बनाते हैं, चित्तौड़गढ़ के 51 वर्षीय श्रीकृष्ण रावल बर्फीले तूफानों से रुबरू हो रहे हैं। पिछले 20 साल में हिमालय की 16 दुर्गम चोटियों पर तिरंगा फहराकर उन्होंने साबित कर दिया है कि 'संकल्प के आगे हिमालय भी बौना है'। यह कहानी सिर्फ पर्वतारोहण की नहीं, बल्कि उस अजेय जिजीविषा की है जिसने साक्षात मौत को देखकर भी कदम पीछे नहीं खींचे।
रावल के सफर में रोमांच के साथ जानलेवा जोखिम भी रहे। साल 2020 में आदि कैलाश ट्रेक के दौरान भीषण एवलांच (बर्फानी तूफान) ने उनके दल को चारों ओर से घेर लिया। जिंदगी और मौत के बीच झूलते इस दल को बचाने के लिए भारतीय सेना को अपने विशालकाय चिनूक हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा।
हिमाचल के प्रसिद्ध 'सारपास ट्रेक' पर जब बर्फीले हालात देखकर 90 में से 80 लोग बीच रास्ते से लौट गए, तब रावल और उनके 9 साथियों (क्रेजी 10 ग्रुप) ने हार नहीं मानी। उन्होंने जमा देने वाली ठंड में बर्फ पिघलाकर पानी पिया और मिशन पूरा किया।
सवाल: 51 की उम्र और यह बेपनाह ऊर्जा, राज क्या है?
रावल: उम्र महज एक आंकड़ा है। मेरी ऊर्जा का राज शुद्ध शाकाहार, नियमित योग और महादेव के प्रति अटूट श्रद्धा है। मैं पहाड़ को 'जीतने' के अहंकार से नहीं, बल्कि समर्पण के भाव से चढ़ता हूं।
सवाल: चोटी पर तिरंगा फहराते वक्त क्या महसूस होता है?
रावल: वहां ऑक्सीजन कम और हड्डियां गलाने वाली ठंड होती है। प्रकृति आपको शिखर पर 10-15 मिनट से ज्यादा रुकने नहीं देती। उस चंद मिनटों में जब तिरंगा लहराता है, तो वही मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी पूंजी होती है।
रावल: आज की पीढ़ी डिजिटल स्क्रीन में कैद है। मेरा गुरुमंत्र है- प्रकृति के करीब आएं। प्रकृति की गोद में जाना वैसा ही है जैसे एक बच्चा अपनी मां से मिलता है। योग ही असली पावर बैंक है।
हौसलों का रूट मैप
क्षेत्रप्रमुख फतह की गई चोटियां/स्थानचीन (तिब्बत)कैलाश मानसरोवर (2015)उत्तराखंडआदि कैलाश, केदारकांठा, वसुधारा, हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी, चंद्रशिला।हिमाचल व अन्यमणिमहेश, सारपास, अमरनाथ (J&K), संदकफू-फालूट (पश्चिम बंगाल)।अगला लक्ष्यअन्नपूर्णा बेस कैंप (ABC) और एवरेस्ट बेस कैंप (EBC)।
रावल का कहना है कि राजस्थान के युवाओं में अपार साहस है, लेकिन ट्रेनिंग की कमी है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि प्रदेश में उत्तराखंड की तर्ज पर 'माउंटेनियरिंग एकेडमी' खुले। वे नई पीढ़ी को नि:शुल्क प्रशिक्षण देने के लिए तैयार हैं।
रावल केवल पहाड़ों के ही नहीं, बल्कि पानी के भी खिलाड़ी हैं। वे परमाणु ऊर्जा विभाग की राष्ट्रीय तैराकी प्रतियोगिताओं में कई मेडल जीत चुके हैं।