चित्तौड़गढ़

Chittorgarh: भू-माफियाओं का खेल, लापता किसान की जगह ‘फर्जी रतना’ बनाकर रजिस्ट्री, 32 साल बाद फर्जीवाड़े का खुलासा

Rajasthan Land Registration Scam: बेगूं उपखंड के हरिपुरा गांव में भू-माफियाओं के दुस्साहस की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने सरकारी तंत्र और रजिस्ट्री प्रक्रिया की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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चित्तौड़गढ़ जिला कलक्ट्रेट कार्यालय, पत्रिका फाइल फोटो
चित्तौड़गढ़ जिला कलक्ट्रेट कार्यालय, पत्रिका फाइल फोटो

Rajasthan Land Registration Scam: बेगूं उपखंड के हरिपुरा गांव में भू-माफियाओं के दुस्साहस की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने सरकारी तंत्र और रजिस्ट्री प्रक्रिया की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। 32 साल पहले जो कृषक लापता हो गया, दलालों ने उसके हमनाम को खड़ा कर लाखों की जमीन का सौदा पार लगा दिया।

पड़ोसी की शिकायत से फूटा भांडा

इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब पड़ोसी मनीष कुमार सोनी ने इसकी शिकायत कलक्टर से की। उन्होंने मांग की है कि इस फर्जी रजिस्ट्री को तुरंत निरस्त कर भूमि को वापस राजकीय घोषित किया जाए और संलिप्त दलालों पर मुकदमा दर्ज हो। यह मामला महज एक जमीन का विवाद नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ का गंभीर अपराध है। रजिस्ट्री सही है तो 9 साल के बच्चे के नाम पर आवंटन ही गलत हुआ और आवंटन सही हुआ तो लापता व्यक्ति के नाम पर रजिस्ट्री कैसे हो सकती है? ऐसे में आम आदमी की जमीन कितनी सुरक्षित है?

पड़ताल: वो तीन बड़े सवाल जो फर्जीवाड़े की पोल खोलते हैं

  1. उम्र का पेच: जिस रतना के नाम रजिस्ट्री हुई, उसका जन्म 1983 का है। यानी 1992 में वह सिर्फ 9 साल का था। नाबालिग को आवंटन कैसे संभव है?
  2. पहचान का संकट: रजिस्ट्री करने वाले और खरीदने वाले, दोनों को ही जमीन की वास्तविक लोकेशन का पता तक नहीं है।
  3. सिस्टम की चूक: जब आवंटी आवंटन बाद कहीं चला गया। गांव से लापता हो गया तो उसकी गेर खातेदारी खातेदारी में कैसे बदल गई। बिना स्थलीय सत्यापन और वारिसों की जांच किए हमनाम के आधार पर रजिस्ट्री कैसे होने दी गई?

पूरा मामला: गायब रतना की जगह फर्जी रतना का खेल

1992 का आवंटन: हरिपुरा निवासी रतना पुत्र काशीराम भील को 1.08 हेक्टेयर जमीन मिली।

पलायन: आवंटन के कुछ समय बाद ही रतना गांव छोड़कर चला गया, जिसका आज तक कोई सुराग नहीं है।

दलालों की एंट्री: जमीन खाली देख दलालों ने कुलाटिया गांव से एक हमनाम ''रतना'' को खोज निकाला और 10 मार्च को बिछोर निवासी मोहनलाल के नाम रजिस्ट्री करवा दी।

तहसीलदार ने लगाया संदेहास्पद का नोट

मामला जिला कलक्टर तक पहुंचने के बाद बेगूं तहसीलदार गोपाल जीनगर ने मोर्चा संभाला है। तहसीलदार ने इस पंजीयन पर सख्त नोट लगाते हुए इसे राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1955 की धारा 39 के तहत संदेहास्पद माना है। तहसीलदार ने रजिस्ट्री में नोट लगा कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।

हमने दस्तावेज पर नोट लगा दिया है कि यह पंजीयन संदेहास्पद है। राजस्व अभिलेखों में इसे केवल दर्ज किया गया है, इसकी सत्यता की जांच की जा रही है।

-गोपाल जीनगर, तहसीलदार, बेगूं

Updated on:
05 Apr 2026 10:14 am
Published on:
05 Apr 2026 10:14 am