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चित्तौड़गढ़: गर्मी की छुट्टियों ने बचाई बच्चों की जान, स्कूल की छत की 15 पट्टियां धमाके से गिरीं

Rajasthan School Safety Issue: चित्तौड़गढ़ में भूपालसागर उपखंड के जाशमा उच्च माध्यमिक स्कूल के बरामदे की 15 पट्टियां टूटकर धमाके के साथ गिर गई। इस घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। गनीमत रही कि अभी गर्मियों कि छुटि्टयां चल रही है और स्कूल बंद है। अगर स्कूल समय में हादसा होता तो यह झालावाड़ से बड़ा हादसा हो सकता था।

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Dilapidated school building Rajasthan

चित्तौड़गढ़ में स्कूल की छत गिरी, बड़ा हादसा टला, पत्रिका फोटो

Rajasthan School Safety Issue: चित्तौड़गढ़ में भूपालसागर उपखंड के जाशमा उच्च माध्यमिक स्कूल के बरामदे की 15 पट्टियां टूटकर धमाके के साथ गिर गई। इस घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। गनीमत रही कि अभी गर्मियों कि छुटि्टयां चल रही है और स्कूल बंद है। अगर स्कूल समय में हादसा होता तो यह झालावाड़ से बड़ा हादसा हो सकता था। इतने बड़े हादसे के बाद जब जिम्मेदारों से बात की तो सभी का गैर जिम्मेदाराना जवाब मिला।

दिन में बैरिकेडिंग की रात में गिरी पट्टियां

जाशमा राउमावि में गुरुवार रात हुए इस हादसे ने सिस्टम की पोल खोल कर रख दी। स्कूल के 45 साल पुराने बरामदे की पट्टियों में महीनों से दरारें बढ़ रही थीं। गुरुवार को जब पट्टियों में बड़े क्रैक दिखे, तो संस्था प्रधान ने आनन-फानन में वहां प्लास्टिक की रस्सी और जाली बांधकर बैरिकेडिंग करवाई, लेकिन सिस्टम की सुस्ती पर वक्त भारी पड़ गया और गुरुवार रात को ही छत भरभराकर गिर गई। शुक्रवार को प्रशासनिक टीम सिर्फ मौका मुआयना की रस्म अदायगी करने पहुंची और रिपोर्ट आगे खिसका दी।

डीईओ का अजीब तर्क

डीईओ ने कहा कि हमने इस स्कूल को पहले ही आइडेंटिफाई कर रखा था। रिकॉर्ड में यह स्कूल मरम्मत योग्य घोषित था, जर्जर नहीं। अब विभाग से कौन पूछे कि 15 पट्टियां गिरने के बाद भी अगर बिल्डिंग जर्जर नहीं है, तो जर्जर किसे कहते हैं?

ग्रामीणों में आक्रोश, खोला मोर्चा

ग्रामीणों का कहना है कि कई महीनों से अधिकारियों को आगाह कर रहे थे कि छत कभी भी गिर सकती है। अधिकारियों के लिए यह सिर्फ एक प्रस्ताव या पॉलिसी हो सकती है, लेकिन हमारे लिए यह हमारे बच्चों की जिंदगी का सवाल है। अगर 20 जून तक स्कूल पूरी तरह सुरक्षित नहीं हुआ, तो हम बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे और उग्र आंदोलन करेंगे।

इनका कहना है

ये तो पॉलिसी लेवल की स्थिति है। हम तो केवल प्रस्ताव बनाकर भेज सकते हैं। आगे राज्य सरकार क्या निर्णय लेती है, यह उनका विवेकाधिकार है। हमारी तो केवल यही प्रार्थना रहती है कि हम सदैव अच्छा काम करते रहें।
-महेश गंगोरिया, एसडीएम, भूपालसागर

जाशमा स्कूल के लिए डीएमफटी फंड से 5 लाख रुपए की स्वीकृति पहले ही हो चुकी है। स्कूल खुलने से पहले यानी 20 जून तक हर हाल में छत की मरम्मत का काम पूरा करवा लिया जाएगा।
-राजेंद्र शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी, चित्तौड़गढ़

पत्रिका स्टैंड: अब प्रार्थना नहीं, तुरंत एक्शन चाहिए सरकार

एक तरफ एसडीएम साहब की लाचारी है, तो दूसरी तरफ डीईओ साहब के कागजी दावे। पत्रिका सरकार से सीधा सवाल करता है कि जब बजट स्वीकृत था, तो काम शुरू होने के लिए क्या छत गिरने का इंतजार किया जा रहा था? अब कागजी घोड़े दौड़ाना बंद होना चाहिए। 20 जून की जो डेडलाइन तय की गई है, उस पर युद्धस्तर पर काम शुरू हो, वरना जिम्मेदार अधिकारियों पर 'क्रिमिनल नेग्लिजेंस' (आपराधिक लापरवाही) का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।