चित्तौड़गढ़

Neha Tanwar : गैर जैन समाज की युवती का बड़ा फैसला, पंजाब की नेहा तंवर बड़ीसादड़ी में बनेगी जैन साध्वी

Neha Tanwar : गैर जैन समाज की युवती का बड़ा फैसला। सेन समाज की बेटी पंजाब की नेहा तंवर चित्तौड़गढ़ के बड़ीसादड़ी में जैन साध्वी बनेगी। यह अनूठा इतिहास सोमवार को बड़ीसादड़ी की धरा पर रचा जाएगा।

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पंजाब की नेहा तंवर। फोटो पत्रिका

Neha Tanwar : चित्तौड़गढ़ के बड़ीसादड़ी में अध्यात्म की राह पर जब कदम बढ़ते हैं, तो जाति, क्षेत्र और समाज की सीमाएं गौण हो जाती हैं। कुछ ऐसा ही अनूठा इतिहास सोमवार को बड़ीसादड़ी की धरा पर रचा जाएगा। यहां पंजाब के मनासा (खेर कलां) की एक गैर-जैन युवती, नेहा तंवर, जैन धर्म की कठिन साधना को अपनाकर साध्वी के रूप में दीक्षा ग्रहण करेंगी।

यह दीक्षा न केवल एक मुमुक्षु के संयम पथ का प्रारंभ है, बल्कि सामाजिक समरसता की एक नई मिसाल भी है। बड़ीसादड़ी के कृष्ण वाटिका खेल मैदान पर स्थित वह ऐतिहासिक वटवृक्ष एक बार फिर अध्यात्म के जयकारों से गूंजेगा।

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यह वृक्ष अब तक 127 दीक्षाओं का मूक साक्षी रहा है, जिनमें से 38 संयमी आज भी धर्म की प्रभावना कर रहे हैं। सोमवार को इसी वृक्ष के नीचे छोटे जैन दिवाकर धर्म मुनि महाराज के शिष्य चिराग मुनि मसा के मुखारबिंद से नेहा जैन दीक्षा ग्रहण करेंगी।

12 जैन परिवार वाले गांव से दीक्षा तक का सफर

मुमुक्षु नेहा ने विशेष साक्षात्कार में बताया कि उनके गांव खेर कलां (मनासा) की आबादी करीब 2 हजार है, जिसमें महज 12 परिवार जैन समाज के हैं। शेष सभी अन्य जातियों के हैं। बावजूद इसके नेहा का परिवार वर्षों से जैन संस्कारों से जुड़ा है। घर में कभी रात्रि भोजन नहीं होता। साधु-संतों के गांव में आगमन और साध्वी धैर्यप्रभा के प्रवचनों ने नेहा के भीतर वैराग्य का बीज बोया, जो अब एक विशाल संकल्प बन चुका है। 12वीं तक शिक्षित नेहा सात बहनों और एक भाई के भरे-पूरे परिवार से आती हैं। पिता राजेंद्र और माता सोरमी देवी कृषि कार्य से जुड़े हैं।

गैर जैन समाज की युवती नेहा तंवर का बड़ा फैसला। फोटो पत्रिका

दृढ़ निश्चय के आगे सबको झुकना पड़ा

नेहा ने बताया कि शुरुआत में परिवार ने मोहवश समझाइश की, लेकिन उनके दृढ़ निश्चय के आगे सबको झुकना पड़ा। पिछले एक वर्ष से नेहा साध्वी मंडल के साथ नंगे पैर पैदल विहार कर रही हैं। उन्होंने इस दौरान जैन प्रतिक्रमण, भक्तामर, दशवैकालिक सूत्र और उत्तराध्ययन सूत्र जैसे कठिन आगमों का कंठस्थ वाचन कर लिया है।

मुमुक्षु नेहा तंवर ने बताया कि जब लक्ष्य बना लिया, तो पीछे हटने का सवाल ही नहीं। पिछले एक साल से साध्वीजी के साथ गोचरी लाकर ग्रहण करना और सीमित संसाधनों में रहना ही मेरा जीवन बन गया है। अब यही मेरा स्थायी मार्ग है।

खास बातें : जो इस दीक्षा को बनाती हैं अनूठा

सेन समाज की बेटी का जैन श्रमण संस्कृति को अपनाना। मोबाइल और आधुनिक सुख-सुविधाओं का त्याग कर अपरिग्रह का संकल्प। दो बड़ी बहनों (सपना और रेखा) का विवाह हो चुका है, तीसरी बेटी ने चुना वैराग्य। एक ही स्थान (वटवृक्ष) पर होने वाली यह 128वीं दीक्षा होगी।

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Updated on:
05 Jan 2026 09:54 am
Published on:
05 Jan 2026 09:52 am
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