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Success Story : बाडमेर के एक छोटे से गांव के विकास चौधरी बने लेफ्टिनेंट, खुशी से झूमे ग्रामीण, पढ़ें यह प्रेरणादायक कहानी

Success Story : एक छोटे से गांव के विकास चौधरी की सफलता को देख खारिया तला, भाडखा गांव ही नहीं पूरा बाड़मेर खुशियों से झूम उठा। भारतीय सेना के कमीशंड अधिकारी के तौर पर विकास चौधरी लेफ्टिनेंट के पद चुने गए। विकास चौधरी की सफलता की कहानी राजस्थान के युवाओं के लिए एक मिसाल है।

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अपने बाबा को सलामी देता विकास चौधरी। फोटो पत्रिका

Success Story : राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर के खारिया तला गांव के एक युवा विकास चौधरी की सफलता आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणादायक कहानी बन गई है। विकास चौधरी भारतीय सेना में कमीशन अधिकारी के रूप में लेफ्टिनेंट बने हैं। उनके पिता सोना राम भी सेना में सेवारत है। सोना राम भारतीय सैन्य अकादमी के स्वर्ण पदक विजेता भी हैं। पिता सोना राम ने अपनी कड़ी मेहनत से एक सैनिक से अधिकारी तक का सफर तय कर एक मिसाल कायम किया है।

राष्ट्रपति की तरफ से प्रदान किया गया कमीशन गजट

पिता की वर्दी और सेना का रौबीला अंदाज विकास चौधरी को हमेशा आकर्षित करता था। ऊपर से देश की सेवा विकास के रोम रोम में भरी हुई थी। विकास चौधरी ने जेईई आईआईटी के बजाय अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए 1 दिसंबर 2021 को 12वीं के बाद टेक्निकल एंट्री स्कीम के जरिए ऑल इंडिया में 75वीं रैंक हासिल कर ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी गया में प्रवेश लिया।

इसके बाद कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग पुणे, जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी दिल्ली से बीटेक डिग्री के साथ-साथ सैन्य प्रशिक्षण हासिल किया और भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से कमीशन के लिए दीक्षांत परेड में शामिल हुए। जहां उसने लेफ्टिनेंट के पद और गरिमा की शपथ ली। इस मौके पर नवनियुक्त अधिकारियों को राष्ट्रपति की तरफ से कमीशन गजट प्रदान किया गया।

विकास चौधरी अपने परिवार के चौथे सदस्य

सेना में नौकरी करने वाले विकास चौधरी अपने परिवार के चौथे सदस्य हैं। इससे पहले इनके ताऊ गोकलाराम भारतीय वायु सेना, पिता सोना राम और चाचा नाथू राम भारतीय सेना में पहले से सेवारत हैं। विकास के पिता सोना राम और मां ललिता चौधरी हैं।

छोटे भाई भी सेना में अफसर बनने का इच्छुक

लेफ्टिनेंट विकास चौधरी ने भारतीय सेना की इंजीनियर कोर की प्रतिष्ठित 7 इंजीनियर्स रेजिमेंट में कमीशन प्राप्त किया है। इनकी प्रेरणा से इनके छोटे भाई भाग्यवर्धन चौधरी भी सेना में अफसर बनने के इच्छुक है।

परिवार के समर्थन ने लक्ष्य तक पहुंचने की ताकत दी

विकास चौधरी से जब उनकी सफलता के बारे में बात की गई तो उन्होंने बेहद शालीनता के साथ हर सवाल का जवाब दिया। प्रेरणा किससे मिली इस पर विकास ने बताया कि मुझे सेना में जाने की प्रेरणा मेरे पिता और मेरे परिवार से मिली। बचपन से मैंने घर में अनुशासन, कर्तव्य और देशसेवा के संस्कार देखे। मेरे पिता ने हमेशा मुझे मेहनत, ईमानदारी और जिम्मेदारी का महत्व सिखाया। साथ ही परिवार के समर्थन ने मुझे इस लक्ष्य तक पहुंचने की ताकत दी।

मेरे पिता और मेरा परिवार मेरे हीरो हैं

अपने परिवार के बारे में भावुक होते हुए विकास ने बताया मेरे हीरो मेरे पिता और मेरा परिवार हैं। उन्होंने मुझे हर परिस्थिति में संतुलन बनाए रखना, मेहनत और समर्पण का भाव रखना सिखाया। बस उसी राह पर चलकर मैं एक बेहतर इंसान और अधिकारी बनना चाहता हूं।

हर असफलता ने मुझे और मज़बूत बनाया

सफलता न मिलने पर कभी निराशा सामने आई तो विकास चौधरी ने कहा, हां, इस सफर में कठिन समय और असफलताएं जरूरी आईं, जब निराशा भी हुई। लेकिन हर असफलता ने मुझे और मज़बूत बनाया। मैंने हार नहीं मानी और खुद पर विश्वास बनाए रखा।

TES के माध्यम से हुआ मेरा चयन

सेलक्शन का जरिया क्या रहा? इस पर उन्होंने कहा कि मेरा चयन TES (Technical Entry Scheme) के माध्यम से हुआ। इसमें 12वीं कक्षा के अंकों और JEE Percentile के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग होती है। शॉर्टलिस्ट होने के बाद SSB इंटरव्यू और फिर मेडिकल प्रक्रिया होती है। यह एंट्री उन युवाओं के लिए है जो टेक्निकल बैकग्राउंड के साथ सेना में अधिकारी बनना चाहते हैं।

अपने सपने पर भरोसा रखें, मेहनत से पीछे न हटें

सेना में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए विकास चौधरी ने कहा कि अपने सपने पर भरोसा रखें और मेहनत से कभी पीछे न हटें। रास्ते में मुश्किलें आएंगी, लेकिन धैर्य और लगन से सब संभव है। खुद पर विश्वास रखें और सही दिशा में लगातार प्रयास करते रहें।