चित्तौड़गढ़

सांवलिया सेठ के दरबार में अटूट श्रद्धा: भक्त ने दान की सवा 10 बीघा जमीन, गुरुग्राम से आया 3 किलो का चांदी का छत्र

Sanwaliya Seth Mandir: चित्तौड़गढ़ के प्रसिद्ध सांवलियाजी मंदिर में आस्था का अनूठा उदाहरण देखने को मिला। डूंगरपुर के आसपुर निवासी अमरजी पटेल ने सवा 10 बीघा खातेदारी जमीन भगवान सांवलियाजी के नाम दान कर दी। वहीं, हरियाणा के गुरुग्राम के एक श्रद्धालु ने 3 किलो 283 ग्राम वजन का चांदी का छत्र भेंट किया।
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Chittorgarh Sanwaliya Seth Mandir
अमरजी पटेल (पत्रिका फोटो)

Chittorgarh Sanwaliya Seth Mandir: चित्तौड़गढ़: प्रसिद्ध कृष्ण धाम मंडफिया स्थित श्री सांवलिया सेठ मंदिर में भक्तों की अटूट आस्था और समर्पण के नए-नए उदाहरण देखने को मिल रहे हैं। सांवलिया सेठ के प्रति जन-जन में इतनी गहरी श्रद्धा है कि लोग अपनी गाढ़ी कमाई और संपत्ति खुशी-खुशी भगवान के चरणों में समर्पित कर रहे हैं। हाल ही में दो अलग-अलग घटनाओं में, एक भक्त ने अपनी सवा 10 बीघा खातेदारी जमीन मंदिर के नाम की है, तो वहीं हरियाणा से आए एक श्रद्धालु ने भव्य चांदी का छत्र अर्पित किया है।

डूंगरपुर के भक्त का 'महादान'

मंदिर के प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र सिंह और संपदा प्रभारी भेरुगिरी गोस्वामी ने जानकारी दी कि डूंगरपुर जिले की आसपुर तहसील के अंतर्गत खोर सामोर गांव के निवासी भक्त अमरजी पटेल (पिता गौतमलाल पटेल) ने अपनी अपार श्रद्धा का परिचय दिया है। उन्होंने अपनी पूरी सवा दस बीघा खातेदारी की बेशकीमती भूमि सेठ सांवलिया जी के नाम दान कर दी।

भक्त अमरजी पटेल ने इस भूमि की बाकायदा कानूनी रजिस्ट्री करवाकर दस्तावेज मंदिर मंडल को सौंप दिए हैं। इस अद्वितीय समर्पण और महादान से अभिभूत होकर मंदिर मंडल के पदाधिकारियों ने दानदाता भक्त अमरजी पटेल का पारंपरिक रीति-रिवाज से स्वागत किया। उन्हें उपरना ओढ़ाकर और भगवान का महाप्रसाद भेंट कर उनका अभिनंदन व बहुमान किया गया।

गुरुग्राम से आया 3 किलो 283 ग्राम का कलात्मक चांदी का छत्र

सांवलिया जी के दरबार में केवल जमीन ही नहीं, बल्कि कलात्मक भेंटों का सिलसिला भी लगातार जारी है। मंदिर भेंट कक्ष प्रभारी शंकरलाल कुलमी ने बताया कि हरियाणा के गुरुग्राम से आए एक गुप्त श्रद्धालु ने अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर भगवान सांवलिया सेठ के चरणों में एक भारी-भरकम और आकर्षक चांदी का छत्र अर्पित किया।

बताते चलें कि छत्र का कुल वजन 3 किलोग्राम 283 ग्राम है। वहीं, गुरुग्राम निवासी इस श्रद्धालु ने अपना नाम व पहचान गुप्त रखी है। मनोकामना पूरी होने पर अपनी हाजिरी लगाने पहुंचे इस भक्त का भी मंदिर मंडल की ओर से उपरना ओढ़ाकर और महाप्रसाद देकर सहर्ष स्वागत व सम्मान किया गया।

श्रद्धालुओं में बनी चर्चा का विषय

सांवलिया सेठ के दरबार में प्रतिदिन देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। लेकिन जमीन के बड़े हिस्से का दान और इस प्रकार गुप्त रूप से कीमती धातुओं के छत्र-आभूषण अर्पण की घटनाएं आमजन और अन्य श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था व कौतूहल का विषय बनी हुई हैं। सांवलिया जी को व्यापार का पार्टनर मानने वाले भक्तों की यह अनूठी भक्ति पूरे क्षेत्र में चर्चा में है।

Updated on:
25 Jul 2026 08:40 pm
Published on:
25 Jul 2026 08:40 pm