चूरू

Churu : चाड़वास के अशोक ने ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ तक बनाई पहचान

अशोक इससे पहले भी कई टीवी प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रह चुके हैं। उनकी प्रमुख उपलब्धियों में टीवीएफ की वेब सीरीज ‘द पिरामिड स्कीम’ शामिल है, जिसमें उन्होंने एक न्यूज एंकर की भूमिका निभाई है।

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Jun 12, 2026
Actor Ashok Prajapat

Tarak Mehta Ka Ulta Chashma : चूरू. जिले के चाड़वास गांव के अशोक प्रजापत ने अपने संघर्ष, मेहनत और अभिनय प्रतिभा के दम पर मुंबई की फिल्म एवं टेलीविजन इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनानी शुरू कर दी है। हाल ही में वे देश के लोकप्रिय कॉमेडी धारावाहिक ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में अभिनय करते नजर आए। उनका एपिसोड 7 जून को प्रसारित हुआ, जिसे दर्शकों ने सराहा।

श्रीचंद प्रजापत के पुत्र अशोक वर्ष 2016 में अपने सपनों को साकार करने के उद्देश्य से चाड़वास से मुंबई पहुंचे थे। शुरुआती दौर में उन्होंने रियल एस्टेट क्षेत्र में कार्य शुरू किया और वर्तमान में भी एक सफल व्यवसायी के रूप में इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। हालांकि अभिनय के प्रति उनका जुनून लगातार बरकरार रहा। इसी लगन के चलते उन्होंने थिएटर और अभिनय प्रशिक्षण से जुड़कर अपने हुनर को निखारना जारी रखा।

लगातार प्रयासों और वर्षों के संघर्ष के बाद उन्हें देश के चर्चित टीवी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में अभिनय का अवसर मिला। भले ही उनकी भूमिका छोटी रही हो, लेकिन चूरू जिले के एक ग्रामीण परिवेश से निकलकर देश के सबसे लोकप्रिय धारावाहिकों में जगह बनाना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है।

अशोक इससे पहले भी कई टीवी प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रह चुके हैं। उनकी प्रमुख उपलब्धियों में टीवीएफ की वेब सीरीज ‘द पिरामिड स्कीम’ शामिल है, जिसमें उन्होंने एक न्यूज एंकर की भूमिका निभाई है। यह वेब सीरीज 5 जून को अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई है।

फूलन देवी के जीवन पर बनी फिल्म में किया काम
इसके अलावा अशोक ने अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्देशक रिची मेहता (Film Director Richi Mehta) के साथ भी एक फिल्म में काम किया है। यह फिल्म चंबल की चर्चित फूलन देवी (Phoolan Devi) के जीवन पर आधारित बताई जा रही है, जिसके आगामी समय में रिलीज होने की संभावना है। अशोक की उपलब्धियों से परिवार, मित्रों और क्षेत्रवासियों को गर्व है। उनकी सफलता ग्रामीण अंचल के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरी है। अशोक प्रजापत (Actor Ashok Prajapat) का सफर यह साबित करता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और सपनों को साकार करने का जज्बा हो, तो गांव की पगडंडियों से निकलकर भी मायानगरी मुंबई में पहचान बनाई जा सकती है।

Updated on:
12 Jun 2026 06:09 pm
Published on:
12 Jun 2026 05:26 pm