चूरू

Rajasthan Crime: राजस्थान में 2.70 करोड़ की हुई थी चोरी, फिर पुलिस ने किया AI का इस्तेमाल और ऐसे पकड़े गए शातिर

पुलिस ने तमाम फुटेज के जरिए फेस रिकॉग्निशन सॉफ्टवेयर से 100 से अधिक चेहरे निकाले, जिसमें दोनों चोरों के चेहरों से मिलती-जुलती फोटो बन पाईं। इसके बाद चोरों की पहचान की गई।

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Dec 10, 2024

Rajasthan Crime News: राजस्थान में संभवता पहला ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें एआइ तकनीक से 2.70 करोड़ की चोरी करने वालों को गिरफ्तार किया गया है। चूरू के रतनगढ़ शहर में पिछले दिनों एक ज्वैलरी शोरूम में पांच चोरों ने वारदात को अंजाम दिया। सीसीटीवी से बचने के लिए चोरों ने चेहरे पर नकाब और हाथों में दस्ताने पहने हुए थे। एसपी जय यादव ने बताया कि वारदात की सूचना मिलने पर चोरों की पहचान के लिए बड़ी संख्या में सीसीटीवी फुटेज खंगाले।

फुटेज में नकाब लगाए चोरों के कई एंगल से फुटेज मिले और उनकी आंखें नजर आ रही थीं। तमाम फुटेज को फेस रिकॉग्निशन सॉफ्टवेयर से 100 से अधिक चेहरे निकाले गए, जिसमें दोनों चोरों के चेहरों से मिलती-जुलती फोटो बन पाईं। इसके बाद चोरों की पहचान की गई और गिरोह के तीन लोगों को गिरफ्तार किया। अभी दो चोर फरार हैं। एसपी ने बताया कि नकाब लगाए चोरों को पकड़ने की पूरी तकनीक का खुलासा नहीं कर सकते। एआइ तकनीक चोरों को पकड़ने में मददगार साबित हुई है। आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उनकी गैंग ने राजस्थान, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में चोरी की वारदातों को अंजाम दिया है।

दिल्ली की प्लेट हटा राजस्थान नंबर की लगाई

चोरों ने वारदात में उपयोग दिल्ली की कार पर राजस्थान नंबर की प्लेट लगा दी। चोर कच्चे रास्तों का उपयोग करते हुए वारदात करने आए और वापस भाग गए। टोल नाका का उपयोग भी नहीं करते थे। गैंग में शामिल चार आरोपी उत्तर प्रदेश के और एक राजस्थान निवासी है। आरोपी ज्वैलरी शोरूम से 17 लाख रुपए नकदी, 1.5 किलो सोना और 2 क्विंटल चांदी के बर्तन चुरा ले गए थे।

सैकड़ों फुटेज जोड़कर पुलिस पहुंची चोरों तक

पुलिस के पास चोरों के फुटेज तो हाथ लग गए, लेकिन किसी भी फुटेज में एक भी चोर का चेहरा नहीं दिख पा रहा था। ऐसे में पुलिस ने एसओजी, जयपुर और दूसरे राज्यों की पुलिस की मदद ली। पुलिस ने एआइ की एलपीएल तकनीक से फुटेज में आई आंखों से चोरों के चेहरे की तस्वीर निकाली। साथ ही कार के अलग-अलग एंगल के फुटेज जोड़कर एआई के माध्यम से गाड़ी के असली नंबर का पता किया।

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