चूरू

Churu News: हार्ट अटैक ने छीना गांव का वीर सपूत, छुट्टी पर आए थे घर, 18 महीने के मासूम बेटे ने दी अंतिम विदाई

सादुलपुर के निकट डोकवा गांव में भारतीय सेना के जवान सत्येंद्र महलां का बुधवार को सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। हृदय गति रुकने से जवान के निधन की खबर से गांव में शोक छा गया।
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Jun 24, 2026
Soldier dies in Churu
सादुलपुर गांव डोकवा निवासी सैनिक सत्येंद्र महलां। फोटो- पत्रिका

चूरू। निकटवर्ती गांव डोकवा का माहौल बुधवार को गमगीन हो गया, जब भारतीय सेना के जवान सत्येंद्र महलां (30) का सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अचानक हृदय गति रुकने से जवान की मौत की खबर मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई। शाम को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई तो हर आंख नम नजर आई। परिजनों के अनुसार सेना में कार्यरत सत्येंद्र महलां 10 जून को छुट्टी लेकर गांव आए थे। बुधवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए। हृदय गति रुकने से उनकी मौत हो गई। जवान की असमय मौत की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

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गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दी अंतिम सलामी

बीकानेर से पहुंची 14 आर्मड रजिमेंट की टुकड़ी ने जेसीओ शीशराम और नायक राकेश कुमार के नेतृत्व में जवान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सेना के जवानों ने अंतिम सलामी दी तथा तिरंगा परिजनों को सौंपा। शाम 7.30 बजे सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस अवसर पर पूर्व विधायक नंदलाल पूनिया, एसडीएम मनोज खेमादा ,पूर्व सैनिक संघ के अध्यक्ष सूबेदार मुकेश कुमार, पूर्व अध्यक्ष कैप्टन विद्याधर पूनिया, सूबेदार बलवीर सिंह धीधवाल, पूर्व अध्यक्ष जगत सिंह, सूबेदार महासिंह ख्याली, सूबेदार मेजर रामचंद्र सिंह, सैनिक विश्राम ग्रह प्रभारी कैप्टन लाल बहादुर आदि ने सैनिक को श्रद्धांजलि अर्पित कर अंतिम विदाई दी।

तिरंगा यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि देने के लिए युवाओं ने शहीद स्मारक से गांव डोकवा तक तिरंगा यात्रा निकाली। हाथों में तिरंगा लिए युवा ‘सत्येंद्र अमर रहे’ के जयघोष करते हुए चल रहे थे। देशभक्ति गीतों के बीच पूरा गांव भावुक माहौल में अपने लाडले को अंतिम विदाई देता नजर आया। पूर्व सैनिकों के अनुसार सत्येंद्र महलां की सेना में 11 वर्ष की सेवा थी और वे 8 गार्ड रेजिमेंट में तैनात थे। वे 18 माह के पुत्र के पिता थे। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे सत्येंद्र के पिता मुंशीराम महलां भी भारतीय सेना में थे, जिनका दो वर्ष पूर्व निधन हो चुका है।

गांव का चहेता था सत्येंद्र

मिलनसार स्वभाव के धनी सत्येंद्र गांव के युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करते थे। उनकी अचानक मौत से गांव स्तब्ध है। हालात ऐसे रहे कि देर शाम तक कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले और पूरा गांव शोक में डूबा रहा।

Updated on:
24 Jun 2026 09:35 pm
Published on:
24 Jun 2026 09:35 pm