
चूरू. जिला मुख्यालय के सबसे बड़े राजकीय भरतीया अस्पताल (Government Bhartiya Hospital) की सफाई व्यवस्था संभालने वाले सफाईकर्मी अब अपने ही वेतन को लेकर परेशान हैं। अस्पताल को साफ-सुथरा रखने वाले इन कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी मेहनत की कमाई में हर महीने जबरन कटौती की जा रही है। इतना ही नहीं, नियमानुसार मिलने वाले साप्ताहिक अवकाश का लाभ भी नहीं दिया जाता और यदि कोई कर्मचारी अवकाश ले लेता है तो उसके वेतन से राशि काट ली जाती है।
कर्मचारियों का कहना है कि जब वे अपने वेतन का हिसाब मांगते हैं तो उन्हें काम से हटाने की धमकी तक दी जाती है। मामले को लेकर कर्मचारियों ने गत शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को ज्ञापन सौंपा था, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है।
हर महीने वेतन में कटौती का आरोप
सफाईकर्मियों का आरोप है कि अस्पताल में कार्यरत सुपरवाइजर कैलाश चंदेलिया की ओर से प्रत्येक माह उनके वेतन में कटौती की जाती है। कर्मचारियों के अनुसार, एक पारी में कार्य करने वाले कर्मचारी को 6 हजार रुपए तथा दो पारी में कार्य करने वाले कर्मचारी को 12 हजार रुपए मासिक वेतन मिलता है। आरोप है कि इस तय वेतन में से भी हर माह राशि काट ली जाती है, जबकि कटौती का कोई स्पष्ट विवरण कर्मचारियों को नहीं दिया जाता।
चार अवकाश भी नहीं, उल्टा वेतन काट लिया जाता है
सफाईकर्मी मनोज कुमार ने आरोप लगाया कि श्रम नियमों के अनुसार कर्मचारियों को मासिक अवकाश का अधिकार है। उनका कहना है कि महीने में 30 या 31 दिनों के दौरान 24 या 26 दिन कार्य करने के बाद चार दिन का अवकाश मिलना चाहिए, लेकिन अस्पताल में यह सुविधा नहीं दी जा रही। यदि कोई कर्मचारी मजबूरी में अवकाश ले भी लेता है तो उसके वेतन से कटौती कर दी जाती है। इससे कर्मचारियों में लगातार असंतोष बढ़ रहा है।
हिसाब मांगने पर मिलती है धमकी
कर्मचारी अजय कुमार ने आरोप लगाया कि जब भी कर्मचारी अपने वेतन की कटौती का कारण पूछते हैं या हिसाब मांगते हैं तो उन्हें कार्य से हटाने की धमकी दी जाती है। उनका कहना है कि डर के माहौल में कई कर्मचारी खुलकर अपनी बात भी नहीं रख पाते। कर्मचारियों का कहना है कि वे केवल अपनी मेहनत का पूरा पारिश्रमिक और पारदर्शी वेतन व्यवस्था चाहते हैं।
30 से अधिक कर्मचारियों पर असर का दावा
कर्मचारी विनोद कुमार का कहना है कि यह समस्या किसी एक कर्मचारी तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, लगभग 30 कर्मचारियों के वेतन में हर माह कटौती की जाती है। कई बार मौखिक शिकायत करने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला, जिसके बाद सभी ने एकजुट होकर प्राचार्य को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के बाद भी इंतजार
कर्मचारियों ने बताया कि गत शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को पूरे मामले से अवगत कराते हुए लिखित ज्ञापन दिया गया था। उन्हें जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन मिला, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे आगे भी अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
अस्पताल की व्यवस्था संभालने वाले खुद परेशान
विडंबना यह है कि जो सफाईकर्मी प्रतिदिन अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के लिए स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने में जुटे रहते हैं, वही आज अपनी मेहनत की कमाई को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सीमित वेतन में परिवार का पालन-पोषण करना पहले ही मुश्किल है, ऐसे में यदि उसमें भी कटौती हो जाए तो घर का बजट बिगड़ जाता है।
इनका कहना है...
मामला मेरे संज्ञान में है। पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। रमाकांत वर्मा , प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज (PDU Medical College), चूरू