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Rajasthan: नगर परिषद चुनाव में नया मोड़, भाजपा की बाड़ाबंदी में अचानक शुरु हुआ नाच-गाना

सरदारशहर नगर परिषद सभापति चुनाव से पहले भाजपा की बाड़ाबंदी में सियासी तनाव के बीच अचानक माहौल बदल गया। बागी पार्षदों को मनाने और सहमति बनने की खबर के बाद भाजपा खेमे में जश्न शुरू हो गया। पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवा समेत अन्य नेताओं की मौजूदगी में राजस्थानी गीतों पर पार्षद जमकर झूमे।
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चूरू

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Kamal Mishra

Sep 20, 2026

sardarshahar

Sardarshahar: भाजपा की बाड़ाबंदी में उत्सव (फोटो-पत्रिका)

चूरू। नगर परिषद सभापति चुनाव से ठीक पहले सरदारशहर की सियासत में रविवार को उस समय नया मोड़ आ गया, जब भाजपा के भीतर चल रही खींचतान के बीच बागी पार्षदों को मनाने और दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के समाचार सामने आए। सहमति की खबर के बाद भाजपा पार्षदों की बाड़ाबंदी में उत्साह का माहौल देखने को मिला। खुशखबरी मिलते बाड़ाबंदी में नाच-गाना शुरू हो गया, जिसमें बीजेपी के पार्षद भी झूमते नजर आए।

बाड़ाबंदी में जब पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवा और पूर्व पालिका अध्यक्ष सुषमा पींचा सहित अन्य लोगों ने राजस्थानी गीतों की प्रस्तुति दी तो पार्षदों में उत्साह नजर आया। राजस्थानी लोकगीतों की धुन पर भाजपा के पार्षद भी जमकर झूमे। कई पार्षद नृत्य करते नजर आए और पूरी बाड़ाबंदी में देर तक उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

सभापति पद के चुनाव में पांच प्रत्याशियों के मैदान में होने के बाद भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने ही खेमे को एकजुट रखने की थी। ऐसे में सहमति बनने की खबर को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अंतिम तस्वीर मतदान के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

5 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला

नगर परिषद सभापति पद के लिए 5 प्रत्याशी मैदान में हैं। कांग्रेस से मोनिका सैनी, भाजपा से अनिता वर्मा, भाजपा से बागी प्रत्याशी सरला सिद्ध, भाजपा की बागी प्रत्याशी डिंपल राजपूत और निर्दलीय आईना चायल चुनाव मैदान में हैं। चुनाव में भाजपा के अंदरूनी समीकरण और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा था।

55 सदस्यीय परिषद में बहुमत का आंकड़ा 28

सरदारशहर नगर परिषद में कुल 55 वार्ड हैं। सभापति पद पर जीत के लिए 28 पार्षदों का समर्थन आवश्यक है। भाजपा के पास 25 पार्षद और कांग्रेस के पास 22 पार्षद हैं, जबकि 8 पार्षद निर्दलीय हैं। ऐसे में भाजपा को बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए अपने 25 पार्षदों के अलावा कम से कम तीन अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता है।

कांग्रेस को जुटाने होंगे 6 पार्षद

वहीं कांग्रेस को 22 के आंकड़े से बहुमत तक पहुंचने के लिए कम से कम 6 अतिरिक्त पार्षदों का समर्थन चाहिए। यही वजह है कि 8 निर्दलीय पार्षदों का रुख चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। हालांकि मतदान के दौरान वास्तविक समर्थन की स्थिति ही अंतिम तस्वीर साफ करेगी।

सहमति बनाने के प्रयास

सभापति पद के लिए भाजपा के भीतर दो प्रमुख दावेदारों के समर्थक गुटों के बीच लंबे समय से चल रही खींचतान को लेकर राजनीतिक चर्चाएं थीं। इसी बीच पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवा, पूर्व विधायक अशोक पींचा, पार्टी प्रभारी हेमंत लांबा तथा पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ की भूमिका को लेकर स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा रही। बताया जा रहा है कि अलग-अलग स्तर पर बातचीत और मान-मनौव्वल के जरिए बीच का रास्ता निकालने के प्रयास किए गए। चुनाव से पहले भाजपा पार्षदों की बाड़ाबंदी में जहां पहले राजनीतिक गणित और रणनीति को लेकर चर्चाएं चल रही थीं, वहीं माहौल पूरी तरह बदलता नजर आया।

कांग्रेस की नजर भी बदले समीकरण पर

भाजपा में सहमति की खबरों के बीच कांग्रेस के लिए भी चुनावी गणित महत्वपूर्ण हो गई है। कांग्रेस के पास 22 पार्षद हैं और बहुमत के लिए उसे निर्दलीयों में से पर्याप्त समर्थन हासिल करना होगा। अधिकतर निर्दलीय पार्षद भाजपा के समर्थन में दिखाई दे रहे हैं।

सुबह 10 बजे से शुरु होगा मतदान

नगर परिषद सभापति पद के लिए मतदान सोमवार, 21 सितम्बर को होगा। उपखंड अधिकारी एवं निर्वाचन अधिकारी महिपाल सिंह राजावत के अनुसार नगरपरिषद सभागार में सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक बैठक एवं मतदान की प्रक्रिया होगी। मतदान पूरा होने के बाद मतगणना की जाएगी और परिणाम घोषित किया जाएगा।

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मतदान को लेकर प्रशासन और पुलिस की ओर से आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था के साथ बेरिकेडिंग की गई है। गांधी चौक से आमजन और वाहनों की आवाजाही बंद रहेगी। निर्वाचन प्रक्रिया में नगरपरिषद के निर्वाचित पार्षद ही मतदान करेंगे। इसके बाद नगरपरिषद उपसभापति पद के लिए 22 सितम्बर को मतदान प्रक्रिया आयोजित की जाएगी।