
बेनजीर नदीम खान (पत्रिका फोटो)
-जमील अहमद खान
चूरू: बेटियां और महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। जरूरत सिर्फ अवसर मिलने और अपने हौसले को पंख देने की है। झुंझुनूं जिले की बेनजीर नदीम खान ने इसी सोच को सच साबित किया है। चूरू पुलिस में पहली महिला चालक कांस्टेबल बनने वाली बेनजीर ने न केवल पुलिस विभाग में अपनी अलग पहचान बनाई, बल्कि महिलाओं और खासकर मुस्लिम समाज की युवतियों के लिए भी प्रेरणा की मिसाल कायम की है। उनका ससुराल निराधनूं में है, जबकि पीहर बिसाऊ में है।
पुलिस भर्ती परीक्षा-2019 में चयनित बेनजीर ने चुनौतियों के बीच अपनी मंजिल हासिल की। उन्होंने चालक कांस्टेबल पद के लिए पहली बार प्रयास किया था और पहली बार में ही सफलता मिल गई। इससे पहले उन्होंने कांस्टेबल के लिए तीन बार प्रयास किया था, जिसमें से दो बार चयन नहीं हुआ था। तीसरी बार में उनका चयन हुआ था। पहली बार वजन कम होने की वजह से, जबकि दूसरी बार मेरिट में नंबर कम आने के कारण उनका चयन नहीं हो पाया था। इस दौरान वह वाहन चलाने का हुनर सीख चुकी थीं।
शादी के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा और लगातार आगे बढ़ती रहीं। आज वह 112 पुलिस वाहन की चालक हैं। बेनजीर की कहानी सिर्फ एक सरकारी नौकरी हासिल करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह बदलती सामाजिक सोच की तस्वीर भी है। जिस दौर में कई परिवारों में महिलाओं के वाहन चलाने को लेकर भी झिझक देखने को मिलती है, उसी दौर में बेनजीर ने पुलिस की वर्दी पहनकर वाहन की स्टेयरिंग संभाली और यह संदेश दिया कि महिलाओं की क्षमता को किसी सामाजिक सोच या परंपरा की सीमा में नहीं बांधा जा सकता।
बेनजीर की उपलब्धि उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो परिस्थितियों, सामाजिक धारणाओं या पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अपने सपनों को पीछे छोड़ देती हैं। उनका सफर बताता है कि असफलता मंजिल का अंत नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की एक सीढ़ी हो सकती है। बेनजीर ने साबित किया कि अगर हौसला मजबूत हो तो महिला किसी भी क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती है।
उनके पिता इलियास अली और मां रियाज बानो ने उन्हें पुलिस में जाने के लिए प्रोत्साहित किया। वर्ष 2019 में पिता के निधन के बाद भी बेनजीर ने अपने सपने को पूरा करने का सफर जारी रखा।
बेनजीर मुस्लिम समाज की पहली महिला चालक के रूप में भी एक महत्वपूर्ण संदेश दे रही हैं। उनकी सफलता बताती है कि समाज को अब पुरानी सोच और रूढ़ धारणाओं से आगे निकलकर बेटियों को नए अवसर देने की जरूरत है। बेटियां पढ़ाई, खेल, पुलिस, सेना, प्रशासन, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में अपनी योग्यता साबित कर रही हैं।
Updated on:
20 Sept 2026 12:00 pm
Published on:
20 Sept 2026 12:00 pm
